यही कारण है कि दांत व मुख रोग किडनी , लीवर तथा आमाशय को सबसे जल्दी हानि पहंुचाते हैं।
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वमन योग्य रोग- श्वास , कास , प्रमेह , पांडु रोग ( एनीमिया ) , मुख रोग अर्बुद आदि।
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वमन योग्य रोग- श्वास , कास , प्रमेह , पांडु रोग ( एनीमिया ) , मुख रोग अर्बुद आदि।
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कल्पतरू रस : खाँसी , क्षय , श्वास , बुखार , अजीर्ण , मुख रोग व कफ ज्वर नाशक है।
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कल्पतरू रस : खाँसी , क्षय , श्वास , बुखार , अजीर्ण , मुख रोग व कफ ज्वर नाशक है।
16.
जर्दा , तम्बाकू व सिगर॓ट आदि मुख रोग को बढ़ावा देते हैं , इनका सेवन इस रोग को लाइलाज बना सकता है।
17.
मन्जन करते समय यदि इसमें एक बून्द “नीम का तेल” मिला लें और फिर मन्जन करें तो मुख रोग के लिये यह एक उत्कृष्ठ औषधि हो जाती है /
18.
मन्जन करते समय यदि इसमें एक बून्द “ नीम का तेल ” मिला लें और फिर मन्जन करें तो मुख रोग के लिये यह एक उत्कृष्ठ औषधि हो जाती है /
19.
मुख रोग , नेत्र रोग , खुजली , अतिसार , मूत्र रोग , कान रोग , खाँसी , कोढ़ , पेट रोग , वायु रोग , अतिसार आदि गोमूत्र सेवन से ठीक हो सकते हैं।
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जिसमें नेत्र रोग , हड्डी रोग , स्त्री एवं प्रसूत रोग , जनरल फिजिषियन , दंत एवं मुख रोग तथा बाल रोग के विषेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा लगभग एक हजार मरीजों की जांच कर निःशुल्क दवा वितरित की गयी।