| 31. | तेरे बिन जो बीते दिन हैं , जाने किस तरह गए फुरकत तेरी ये जाने, हम कैसे सह गए...
|
| 32. | इस कदर है जाकै ताली हम पै फुरकत में तेरी , बैठ जाते हैं अगर दो गाम भी उठकर चले।
|
| 33. | शबे फुरकत का जागा हूँ , फरिश्तों अब तो सोने दो कभी फुर्सत मे कर लेना हिसाब आहिस्ता आहिस्ता
|
| 34. | ‘हाथ मिलाना दोस्ती का नाम नहीं है , दर्दे फुरकत गम-ए-तनहाई उमर, ये दोस्ती का कोई ईनाम नही है ।
|
| 35. | आई जो मेरे पास तो , मुझे इब्तिला दिया ॥ कभी फुरकत की बात पे,कहा चुप करो जी तुम ।
|
| 36. | ‘हाथ मिलाना दोस्ती का नाम नहीं है , दर्दे फुरकत गम-ए-तनहाई उमर, ये दोस्ती का कोई ईनाम नही है ।
|
| 37. | कभी है मिलन , कभी फुरकत , है यही क्या वो मोहब्बत , वाह रे वाह तेरी कुदरत ! ४.
|
| 38. | तेरी फुरकत में नज़र न आये अपनी भी सूरत , यही वज़ह है कि मैं बचती फिरती हूँ रौशनी से ।
|
| 39. | तेरी फुरकत ने परेशान किया है मुझको , अब तो मिल जा के मेरी जान पे बन आई है .
|
| 40. | इस कदर है जाकै ताली हम पै फुरकत में तेर ी , बैठ जाते हैं अगर दो गाम भी उठकर चले।
|