युग निर्माण योजना का प्रथम प्रयास चिन्तन की अवांछनीयता का निवारण है अर्थात् विचारों की दिशा स्वार्थ भरी संकीर्णता से ऊँची उठाने का प्रयास ।।
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इतना साहस न होने और वस्तु स्थिति को आँख मूँदकर स्वीकारते रहने का अर्थ यह होगा कि राजनैतिक अनीति और अवांछनीयता जितना चाहें , खुलकर खेलें।
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इसी तर्क को सार्त्र ने हमेशा प्रयोग किया , और वे हमेशा शुद्ध व्यक्तिवादियों की अवांछनीयता से बचते रहे जो पाश्चात्य दर्शन पद्धतियों में भरी पड़ी हैं।
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इसी तर्क को सार्त्र ने हमेशा प्रयोग किया , और वे हमेशा शुद्ध व्यक्तिवादियों की अवांछनीयता से बचते रहे जो पाश्चात्य दर्शन पद्धतियों में भरी पड़ी हैं।
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एक दिन यह भी आएगा जब अवांछनीयता के विरुद्ध युग निर्माण योजना तीव्र संघर्ष खड़ा करेगी और करो या मरो की उग्रता लेकर मैदान में आएगी ।।
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समर्थ प्रतिभाएँ जहाँ अपने वर्चस्व से लोकमानस को अपने समान उत्कृष्ट बना सकती हैं , वहाँ उनकी निकृष्टता व्यापक रूप से अवांछनीयता का भी विस्तार कर सकती है।
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अवांछनीयता के विरुद्ध संघर्ष खड़ा किया जाए और मानवीय गरिमा के अनुरूप मर्यादाओं का पालन और वर्जनाओं का अनुशासन अपनाने के लिए हर किसी को बाधित किया जाए।
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अंतिम चौथे दिन यज्ञाग्नि के सम्मुख उन लोगों से व्रत धारण करने को कहा गया , जो अवांछनीयता को छोड़ने और उचित परम्पराओं को अपनाने के लिए तैयार थे।
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लापरवाह , आलसी और प्रमादी ही गंदे देखे गए हैं जो अवांछनीयता से समझौता करके उसे गले से लगाए रह सकता है , वही गंदा भी रह सकता है।
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अतिवादी अवांछनीयता , जो आज छाई दिखाई देती है और कुछ नहीं , अधिकांश लोगों द्वारा अचिंत्य चिन्तन और न करने योग्य क्रियाकृत्य अपना लिए जाने का ही प्रतिफल है।