परन्तु क्या खुजली का निराकरण खुजलाना है ? ??नहीं !!!बल्कि समय रहते यदि इसका उपचार न कराया गया तो कभी कभी त्वचा पर पड़ा दाग जीवन भर के लिए अमिट बनकर रह जाता है या फिर कई अन्य असाध्य रोग का कारण भी बन जाता है.....
42.
परन्तु क्या खुजली का निराकरण खुजलाना है ? ??नहीं !!!बल्कि समय रहते यदि इसका उपचार न कराया गया तो कभी कभी त्वचा पर पड़ा दाग जीवन भर के लिए अमिट बनकर रह जाता है या फिर कई अन्य असाध्य रोग का कारण भी बन जाता है.....अब आगे,&
43.
खुजली में खुजलाना नहीं वरन शतघृत लगाना चाहिए | काँसे की थाली में घी और थोड़ा पानी डालकर १ ०० बार रगड़ो , ये शतघृत बन गया | खुजली पित्त व खून की खराबी के कारण होती है | खून की सफाई के लिए : -
44.
परन्तु क्या खुजली का निराकरण खुजलाना है ? ?? नहीं !!! बल्कि समय रहते यदि इसका उपचार न कराया गया तो कभी कभी त्वचा पर पड़ा दाग जीवन भर के लिए अमिट बनकर रह जाता है या फिर कई अन्य असाध्य रोग का कारण भी बन जाता है.....
45.
- तथा उसके लिए ऐसी चीज़ के द्वारा सफाई करना जाइज़ है जिसमें सुगंध न हो , या अपने सिर या शरीर को धोना और खुजलाना जाइज़ है और यदि ऐसा करने से बिना इच्छा के कोई बाल गिर जाए तो उसके ऊपर कोई चीज़ नहीं है।
46.
उसके लिए बिला गए हैं अब छायादार पेड़ जिनके नीचे हरी घास उगी हो पास में पानी के डाबरे और साफ़ हवा सहलाती उसका तन ग्वालों का अपने हाथ से खुजलाना और डाँस निकालना उनकी देह से भक्ति से की गई वह सारी सेवा अब नहीं है उसके लिए।
47.
ऐसे में अगर कान खुजलाना हो या सरकता हुआ चश्मा ठीक करना हो तो समस्या ! !! एक हाथ में नेप्किन और प्लेट दूसरे में चमचा .तीसरा हाथ भगवान् ने दीया नहीं.मजबूरन पास गुजरते लोगो से कहना पड़ता है.भाई साहब जरा मेरा कान खुजला दीजिये या चश्मा सरका दीजिये .
48.
इन पाँच प्राणों के अतिरिक्त शरीर में ‘ देवदत्त ' , ‘ नाग ' ‘ कृंकल ' , ‘ कूर्म ' एवं ‘ धनंजय ' नामक पाँच उपप्राण हैं , जो क्रमशः छींकना , पलक झपकाना , जँभाई लेना , खुजलाना , हिचकी लेना आदि क्रियाओं को संचालित करते हैं।
49.
इन पाँच प्राणों के अतिरिक्त शरीर में ‘ देवदत्त ' , ‘ नाग ' ‘ कृंकल ' , ‘ कूर्म ' एवं ‘ धनंजय ' नामक पाँच उपप्राण हैं , जो क्रमशः छींकना , पलक झपकाना , जँभाई लेना , खुजलाना , हिचकी लेना आदि क्रियाओं को संचालित करते हैं।