मरण समय में अडोल मन से हो भक्ति से युक्तओै योग बन से भ्रू मध्य प्राणों को साध सम्यक कर याद मिलना अचल अमर से।।
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बेटी के लिए इतनी ही चाहत औ र व्यग्रता यदि सबके मन आ जाए तो कन्या भ्रू न हत्या का ग्राफ स्वयमेव नीचे आ जाए .
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भावप्रदर्शन के लिए हाथ , पैर , नेत्र , भ्रू , एवं कटि , मुख , मस्तक आदि अंगों की विविध चेष्टाओं की अनुकृति आंगिक अभिनय है।
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भावप्रदर्शन के लिए हाथ , पैर , नेत्र , भ्रू , एवं कटि , मुख , मस्तक आदि अंगों की विविध चेष्टाओं की अनुकृति आंगिक अभिनय है।
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नारी-शोषण , बाल-शोषण ! भ्रू ण हत्या भी उसी का एक हिस्सा मान लीजिए ; क्योंकि उसमें भी एक भावी नारी का ही शोषण होता है !
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नारी-शोषण , बाल-शोषण ! भ्रू ण हत्या भी उसी का एक हिस्सा मान लीजिए ; क्योंकि उसमें भी एक भावी नारी का ही शोषण होता है !
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' थाट ' में जो दृष्टि भेद है , वह बिल्कुल अलग है , वहाँ आप शरीर से स्थिर हैं भ्रू विलास और दृष्टि का विस्तार है।
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“अवलोकितेश्वर की आँखों से सूरज और चाँद , भ्रू से महेश्वर, स्कंधों से देवगण, हृदय से नारायण, दाँतों से सरस्वती, मुख से वायु, पैरों से पृथ्वी तथा उदर से वरुण उत्पन्न हुए।'
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“अवलोकितेश्वर की आँखों से सूरज और चाँद , भ्रू से महेश्वर, स्कंधों से देवगण, हृदय से नारायण, दाँतों से सरस्वती, मुख से वायु, पैरों से पृथ्वी तथा उदर से वरुण उत्पन्न हुए।'
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भाई साहब , लगे हाथ यह भी कह डालिए न कि दास कैपिटल अपने उच्च भ्रू अंदाज के कारण मजूदर वर्ग में लोकप्रिय नहीं हो पाया, उसे दार्शनिक, क्रांतिकारी, विद्वान लोग ही पढ़ते रहे.