उनका कथन है कि भले ही कोई पुरुष वेदांग तथा उपनिषदों को जान ले , लेकिन वह कभी विचक्षण नहीं हो सकता क्योंकि यह महाभारत एक ही साथ अर्थशास्त्र, धर्मशास्त्र तथा कामशास्त्र है।
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उनका कथन है कि भले ही कोई पुरुष वेदांग तथा उपनिषदों को जान ले , लेकिन वह कभी विचक्षण नहीं हो सकता क्योंकि यह महाभारत एक ही साथ अर्थशास्त्र, धर्मशास्त्र तथा कामशास्त्र है।
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चूंकि लक्ष्मी स्वयं एक सशक्त साधन है तथा उस साधन का वही विचक्षण प्रयोक्ता पूर्ण रूप से , व्यापक लिप्सारहित उपयोग कर सकता है जो कि अत्यधिक बुद्धिमान एवं सर्वगुण संपन्न हो।
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शब्दों और व्याकरण की पटुता और विचक्षण प्रयोग से प्रखर पंडितों के साहित्य को पुरस्कार सम्मान का गर्व अवश्य प्राप्त होता है , किंतु उनके शास्त्र वाचनालयों के खाने में ही धरे रहते हैं।
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यद्यपि निकोलस को इस बात का बोध था कि इन अनेक वर्षों तक उसने अपने हृदय में उनके प्रति विचक्षण अनुराग भाव पाल रखा था लेकिन उनकी रुचि केवल आमोद-प्रमोद में थी .
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उनका कथन है कि भले ही कोई पुरुष वेदांग तथा उपनिषदों को जान ले , लेकिन वह कभी विचक्षण नहीं हो सकता क्योंकि यह महाभारत एक ही साथ अर्थशास्त्र , धर्मशास्त्र तथा कामशास्त्र है।
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शब्दों और व्याकरण की पटुता और विचक्षण प्रयोग से प्रखर पंडितों के साहित्य को पुरस्कार सम्मान का गर्व अवश्य प्राप्त होता है , किंतु उनके शास्त्र वाचनालयों के खाने में ही धरे रहते हैं।
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' अंग और उपनिषद के सहित चारो वेदो का अध्ययन करके भी , यदि पुराण को नाही जाना गया तो ब्राह्मण विचक्षण नही हो सकता ; क्यूंकी इतिहास पुराण के द्वारा ही वेद की पुष्टीकरनी चाहिए ।
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' ' तब शील-रक्षण , विचक्षण , महाबली , सत्य-रत , सत्यव्रत , सत्यसंध राम ने निज को विवाहित बताया पै असत्य कहा- “ अहहि कुमार मोर लघु भ्राता ‘‘ सुमुखि ! इसको ही वरो वरानने ! मृगलोचने ! ”
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' ' तब शील-रक्षण , विचक्षण , महाबली , सत्य-रत , सत्यव्रत , सत्यसंध राम ने निज को विवाहित बताया पै असत्य कहा- “ अहहि कुमार मोर लघु भ्राता ‘‘ सुमुखि ! इसको ही वरो वरानने ! मृगलोचने ! ”