यजुर्वेद में यज्ञ सम्पन्न करानेवाला पुरोहित ईंट की स्तुति में कहता है-” हे इष्टिका! तुम मां, प्रमा (मातामही), और प्रतिमा (देवीसदृश) हो।
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आज के दौर में भी निर्माण से पहले नींव के जिस पत्थर या आधारशिला की पूजा का अनुष्टान होता है वह यही इष्टिका है।
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आज के दौर में भी निर्माण से पहले नींव के जिस पत्थर या आधारशिला की पूजा का अनुष्टान होता है वह यही इष्टिका है।
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आज के दौर में भी निर्माण से पहले नींव के जिस पत्थर या आधारशिला की पूजा का अनुष्टान होता है वह यही इष्टिका है।
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मोटरकार आदि में एक के बदले चार, छह या आठ सिलिंडर रहते हैं और लोहे की जिस इष्टिका में ये बने रहते हैं उसे ब्लॉक कहते हैं।
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मोटरकार आदि में एक के बदले चार, छह या आठ सिलिंडर रहते हैं और लोहे की जिस इष्टिका में ये बने रहते हैं उसे ब्लॉक कहते हैं।
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यहीं से आर्यजनों ने मिट्टी पकाने की तकनीक जानी और कालांतर में मिट्टी के पिंडों को आग पर तपा-पका कर उससे भवन निर्माण शुरू किया जिसे इष्टका या इष्टिका नाम दिया।
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इस शब्द का संस्कृत से प्राकृत होते हुए हिन्दी तक रूपपरिवर्तन कुछ यूं रहा इष्टिका > इष्टका > इट्टिगा > इट्टी > ईंट यानी आजकल भवननिर्माण के काम आनेवाली प्रमुख आधार सामग्री।
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इस शब्द का संस्कृत से प्राकृत होते हुए हिन्दी तक रूपपरिवर्तन कुछ यूं रहा इष्टिका > इष्टका > इट्टिगा > इट्टी > ईंट यानी आजकल भवननिर्माण के काम आनेवाली प्रमुख आधार सामग्री।