आमतौर पर यह ढाल क्षारीय मृदा क्षेत्रों में 0. 1 से 0.2 प्रतिषत तक होती है।
12.
एक केन्द्र प्रायोजित क्षारीय मृदा सुधार योजना सातवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में चलाई गई थी।
13.
लवणीय और क्षारीय मृदा तब सबसे ज्यादा पैदा होती है, जब खेतों की सिंचाई लगातार लवण युक्त पानी से की जाती है।
14.
एक केन्द्र प्रायोजित क्षारीय मृदा सुधार योजना सातवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में चलाई गई थी।
15.
· अधिकतर जलकूपों द्वारा जल निकास क्षारीय मृदा सुधार के टिकाऊ सुधार के लिए आवष्यक पानी के जलस्तर में कमी लाने में सक्षम होता है।
16.
• अधिकतर जलकूपों द्वारा जल निकास क्षारीय मृदा सुधार के टिकाऊ सुधार के लिए आवश्यक पानी के जलस्तर में कमी लाने में सक्षम होता है।
17.
प्रदेश में पायी जाने वाले क्षारीय मृदा में विनियमशील सोडियम की अधिकता होती हे तथा इसका सुधान मृदा सुधारक यथा जिप्सम, पायराइट आदि के उपयोग के बिना संभव नहीं होता है।
18.
ये कार्यक्रम हैं-शीतल जल मछली-पालन विकास ; जलभराव क्षेत्र और परित्यक्त जलाशयों को जलकृषि संपदा में बदलना, जलकृषि के लिए अंतर्देशीय लवणीय / क्षारीय मृदा का उपयोग और जलाशयों की उत्पादकता बढ़ाने का कार्यक्रम।
19.
क्योंकि केवल सतही जल निकास द्वारा उथले जल स्तर पर नियन्त्रण नहीं किया जा सकता इसलिए यह आवष्यक है कि क्षारीय मृदा के टिकाऊ सुधार के लिए सतही व भूमिगत जल निकास की उचित प्रणालियों के सम्मिश्रण द्वारा जल निकास का प्रावधान किया जाए।
20.
क्योंकि केवल सतही जल निकास द्वारा उथले जल स्तर पर नियन्त्रण नहीं किया जा सकता इसलिए यह आवश्यक है कि क्षारीय मृदा के टिकाऊ सुधार के लिए सतही व भूमिगत जल निकास की उचित प्रणालियों के सम्मिश्रण द्वारा जल निकास का प्रावधान किया जाए।