| 11. | ये ग्यारहवाँ घंटा चालू है... प्यास बढ रही है।
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| 12. | पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, एक ग्यारहवाँ अहंकार।
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| 13. | ग्यारहवाँ संकल्प-हम दूसरों के दुःख-दर्द में काम आएँगे।
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| 14. | अध्याय ग्यारहवाँ-श्लोक २१ से ४०
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| 15. | ग्यारहवाँ खाना: माया के चक्कर में घूमता व्यक्ति।
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| 16. | पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, एक ग्यारहवाँ अहंकार।
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| 17. | अंश से 16 अंश 30 मिनट तक ग्यारहवाँ विशांश&
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| 18. | भूमिहारोत्पत्ति वर्णन नामक ग्यारहवाँ अध्याय समाप्त हुआ।”
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| 19. | अध्याय ग्यारहवाँ-श्लोक १ से २०
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| 20. | एक पुरातत्ववेत्ता की डायरी-ग्यारहवाँ दिन-एक
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