वर्ष 1935 में ' घृणा का गान' में उनका देशानुराग और युवा-आक्रोश बोलता है-'तुम सत्ताधारी मानवता के शव पर आसीन, जीवन के चिर रिपु, विकास के प्रतिद्वंद्वी प्राचीन, तुम श्मशान के देव!
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रोजमर्रा के जीवन में शामिल यह छोटे छोटे बदलाव बच्चों की सोच की दिशा मोड़ने में काफी अहम साबित हो सकते हैं जो हमारे बच्चों में देशानुराग और आत्मबलिदान की चेतना को जन्म देंगें।
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रोजमर्रा के जीवन में शामिल यह छोटे छोटे बदलाव बच्चों की सोच की दिशा मोड़ने में काफी अहम साबित हो सकते हैं जो हमारे बच्चों में देशानुराग और आत्मबलिदान की चेतना को जन्म देंगें।