नरसिंघा राव ने दी इनसाइडर मे लिख दिया था कि-' हम स्वतन्त्रता के भ्रम जाल मे जी रहे हैं ' ।
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1992 मे पूर्व संघी स्वंय सेवक नरसिंघा राव जी के प्रधान् मंत्रित्व मे जब मनमोहन सिंह जी वित्त मंत्री थे अयोध्या का ढांचा गिरा दिया गया।
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नरसिंघा राव जी ने पद छोडने के बाद अपने उपन्यास THE-INSIDER मे कुबूल किया है कि-” हम स्वतन्त्रता के भ्रमजाल मे जी रहे हैं ” ।
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देवता जमलू ऋषि के दरबार में बुधवार देर शाम को उनके प्राचीन वाद्य यंत्र नरसिंघा, करनाल, झड़ी, तूरी, काहवी को बाहर निकाला गया।
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इनके अतिरिक्त नरसिंघा बजाने वाले नरसिंघची, करनाल बजाने वाले करनालची तथा क्नाहल बजाने वाले (क्नालची) अलग से होते हैं परंतु ये 'बजन्तरी' की श्रेणी में नहीं आते।
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एलडीए के टाउन प्लानर नरसिंघा रेड्डी के मुताबिक नियमों के मुताबिक बेसमेंट बनवाने पर ग्राउंड फ्लोर पर कुल एरिया के 20% हिस्से पर ही निर्माण किया जा सकता है।
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12 अगस्त को प्रातः 10 बजे छेदी लाल धरमशाला प्रांगण मे झण्डारोहन का. डी. नरसिंघा राओ जी के कर-कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ जो इस संगठन के प्रभाव शाली नेता रह चुके हैं।
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पद से हटने के बाद 1991 के पी एम पामूलपति वेंकट नरसिंघा राव साहब ने ' दी इन साईडर ' मे स्पष्ट किया था-“ हम स्वतन्त्रता के भ्रमजाल मे जी रहे हैं ” ।
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जब ईश्वर के आज्ञानुसार फरिश्ते इस्राफील अलैहिस सलाम दूसरी बार नरसिंघा फूंकेंगे तो सब लोग अपनी अपनी क़ब्रो से उठ खड़े होंगे और अपने सरों से मिट्टी झाड़ रहे होंगे और एक मैदान मै इकठा होंगे।
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स्वामी नरसिंघा, यशवीर जी महाराज, डॉ. संजीव बालियान, पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, बाबूराम बालियान, अमित राठी, वीरेंद्र प्रमुख कुतुबपुर, डॉ वीरपाल निर्वाल, सुधीर भारतीय, रुपेंद्र सैनी, मांगेराम सैनी, दीपक, विपिन सैनी और विकास आदि मौजूद रहे।