अभी भारत पर हुए आतंकी हमले के बाद जीवित पकड़े गए आतंकी पर अभियोग व न्यायिक प्रक्रिया का प्राम्भ भारत में होने जा रहा है | चैनलों की हर चीज को उत्सव की तरह मनाने की परम्परा के चलते आज लगातार बहस गर्म रही कि कसाब को अपना पक्ष रखने या कहें कि न्यायिक सहायता पाने का अधिकार है या नहीं, पैरवी का अधिकार मिलना चाहिए या नहीं |
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-क्या ऐसा दयालुतापूर्ण होने का नाटक करना छद्म रूप से आतंकवादियों को प्रश्रय देना नहीं है? क्या उनके ग़लत, अनैतिक,बर्बर, कामों को गति, बल व बढ़ावा देना नहीं है?-जब इस देश में युवकों के लिए अनिवार्य सैनिक शिक्षा की आवश्यकता की बातें हो रही हैं, उसे रेखांकित किया जा रहा है, ऐसे में शहीदों की संतानें, संबन्धी या अन्य सामान्य परिवार के बच्चे अथवा युवक क्या सेना का अंग होना स्वेच्छा से स्वीकारेंगे?-क्या यह न्यायिक सहायता भारतीय मनोबल को तोड़ने वाली नहीं है?