‘‘क्या वह लोग जिन्होंने (नबी स.अ.व. की पुष्टि) से इन्कार कर दिया है ध्यान नहीं करते कि यह सब आकाश और धरती परस्पर मिले हुए थे फिर हम ने उन्हें अलग किया‘‘(अल-क़ुरआन: सुर: 21, आयत 30)
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‘‘ क्या वह लोग जिन्होंने (नबी स.अ.व. की पुष्टि) से इन्कार कर दिया है ध्यान नहीं करते कि यह सब आकाश और धरती परस्पर मिले हुए थे फिर हम ने उन्हें अलग किया ‘‘ (अल-क़ुरआन: सुर: 21, आयत 30)
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जहाँ द्रविड़, मगध, कान्यकुब्ज, महाराष्ट्र, बंगाल, पंजाब, गुजरात इत्याादि अनेक देश के लोग परस्पर मिले हुए अपना-अपना काम करते दिखाते हैं और वे एक एक जाति के लोग जिन मुहल्लों में बसे हैं वहाँ जाने से ऐसा ज्ञान होता है मानों उसी देश में आए हैं, जैसे बंगाली टोले में ढाके का, लहौरी टोले में अमृतसर का और ब्रह्माघाट में पूने का भ्रम होता है।
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ध्यान नहीं करते की यह सब आकाश और धरती परस्पर मिले हुए थे, फिर हमने उन्हें अलग किया “ (कुरान: सुर: २ १, आयात ३ ०) इस क़ुरआनी वचन और ” बिग बैंग ” के बिच आश्चर्यजनक समानता से इंकार संभव ही नहीं! यह कैसे संभव है कि एक किताब जो आज से पहले अरब के रेगिस्तानों में व्यक्त हुई अपने अन्दर ऐसे असाधारण वैज्ञानिक यथार्थ समाये हुए है?
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इसीलिए उसने हर चीजें सिर्फ दो, ही बनायीं हैं, उदहारण के लिए, दो समुद्र हैं जो परस्पर मिले हुए हैं “ 55: 19 दो बहते हुए स्रोते (Fountains) हैं ” 55: 50 दो उबलते हुए पानी के कुण्ड हैं “ 55: 66 डराने वालों के लिए दो बगीचे हैं ” 55: 46 दो बगीचे और भी हैं ” 55: 62 क्या अल्लाह इतना भी नहीं जनता कि दो और दो बगीचे मिलकर चार बगीचे होते हैं?