बिना बुलाए कोई उन्हें बेआराम नहीं करेगा परंतु आज अब तक पिताजी ने कुछ कहा नहीं।
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' ' वह माँ की घूरती नज़रों के सामने अपने आप को बेआराम महसूस कर रहा था और झट ही कमरे में से बाहर निकल गया।
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दिलासे के उसके ये शब्द कम से कम रात काटने में मेरे बहुत सहायक होते, अगर चारपाई के खटमल सारी रात मुझे बेआराम न करते।
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ध्यान से लेटें और अपने गाल को मैट पर रखें| यदि यह बेआराम लगे तो, एक पतले चद्दर का प्रयोग करें| यह आपके गरदन और जबड़े में खींचाव को ढीला कर सकता है|
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मगर साथ ही हमे यह भी देखना होगा कि कहीं कोई चीज अत्याधिक तो नही हो रही? भग्वान शिव के प्रति जनता के मन मे जो आदर और आस्था है, हमारे कृत्य कहीं उसे कोई चोट तो नही पहुचा रहे? क्योंकि पिछले आठ-दस सालों से जबसे हमारे इस देश की दोयम दर्जे की राजनीति ने आस्था के इस क्षेत्र मे अपनी घुसपैठ बनाई है, यह देखा जा रहा है कि इस प्रदेश / क्षेत्र का आम निवासी अपने को विचलित / बेआराम मह्सूस करने लगा है।
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उत्सुकता बढ़ती जारही है मकान बेआराम क्यों बन गया, दादा मन में कौन सा दर्द छुपाये हैं, किस टूटे रिश्ते के वारे में अब जानकारी मिलेगी दादा मायूसी क्यों छुपाना चाह रहे हैं, पोती की बिदा तो इसका कारण नहीं | इन दोनो लेखों को क्रमांक १ ० व ११ नहीं दिया गया है, एक ही दिन की पोस्ट दो भागों में और दोनो पर टिप्पणियाँ | अभी तो छोटू के हाथ से चली बन्दूक की गोली का परिणाम भी नहीं आया है | पढ़ते पढ़ते अच्छा लग रहा है