क्यूं उत्तर प्रदेश में बरसों से लगभग तीन दशक से पश्चिमी यू. पी. के वकीलों को हाईकोर्ट की खंडपीठ की मांग के लिए भूखा मरना पड़ता है?
12.
देह पर एक मिलीमीटर भी चर्बी (गलत जगह पर) न हो, और आप किसी मॉडल-सी तन्वंगी दिखें इसके लिये भूखा मरना सबसे आसान (और सस्ता भी) उपाय है.
13.
उसे भूखा मरना पसंद है लेकिन वह किसी के मारे गये सडे मांस को कभी नही खायेगा, और किसी के द्वारा दिये गये सहानुभूति वाले भोजन को लेना तब तक पसंद नही करेगा जब तक कि उसे आदर पूर्वक भोजन नही दिया जाये।
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“ हमें तो इसकी दस परसेंट भी रुप रंग और / या काया मिलती तो आत्म मुग्ध हो रोज सुबह सुबह प्रसाद में खुद को ही एक किलो लड्डू प्रसाद में चढ़ा कर खाते हुए जाते दफ्तर वरना फायदा ही क्या ऐसी काया का कि भूखा मरना पड़े.”
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लेकिन अब जीव-जंतुओं के प्रति हमारे इस व्यवहार पर लगाम लगाने का समय आ गया है क्योंकि हो सकता है आगे चलकर यही हमारे भोजन का एकमात्र जरिया बनें और अगर आज हमने इन्हें मार दिया तो बहुत हद तक यह भी संभव है कि शायद हमें भूखा मरना पड़े.
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हम सोचने लगे-अरे, हमें तो इसकी दस परसेंट भी रुप रंग और / या काया मिलती तो आत्म मुग्ध हो रोज सुबह सुबह प्रसाद में खुद को ही एक किलो लड्डू प्रसाद में चढ़ा कर खाते हुए जाते दफ्तर वरना फायदा ही क्या ऐसी काया का कि भूखा मरना पड़े.
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क्या ऐसा नहीं हो सकता ही राष्ट्रहितकारी ईमानदार पत्रकारिता भी हो जाये तथा पत्रकार को न तो भूखा मरना पडे, न विज्ञापन आदि के लालच में चुप रहना पडे़,न ही अपने आत्मसम्मान से समझौता करना पडे़ और प्रत्येक सच्चे पत्रकार को यह संतुष्टि भी मिले की उसने राष्ट्रसेवक की भूमिका निभाई वो भी बिना अपने ईमान को बेचे व परिवार को भूखों मारे ।
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क्या ऐसा नहीं हो सकता ही राष्ट्रहितकारी ईमानदार पत्रकारिता भी हो जाये तथा पत्रकार को न तो भूखा मरना पडे, न विज्ञापन आदि के लालच में चुप रहना पडे़, न ही अपने आत्मसम्मान से समझौता करना पडे़ और प्रत्येक सच्चे पत्रकार को यह संतुष्टि भी मिले की उसने राष्ट्रसेवक की भूमिका निभाई वो भी बिना अपने ईमान को बेचे व परिवार को भूखों मारे ।