भारत में सतवाहन राज वंश की शक्ति क्षीण होनेपर दक्षिण में पल्लवों के रूप में एक नयी शक्ति का उदय हु आ.
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हलाकि तब से अब तक निर्बाध रूप से प्रति दिन एक बकरे की बलि दी जाती है, परन्तु कछवाहा राज वंश का पतन तब से ही प्रारंभ हो गया था.
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बात निकली तो बताना होगा कि अरक्कल का शाही परिवार केरल का एक मात्र मुस्लिम राज वंश था और शासन करती थी एक महिला जिसे बीवी कह कर संबोधित किया जाता है.
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मंदिर के साथ लगे विशाल प्रांगण में, वाध्य यन्त्रों के ज्ञाता, गायक पुजारी, पाक शास्त्र में निपुण सेवक वृन्द, पुजारी, माली स्वर्णकार, शिल्पी, बढई मंदिर निर्माण में दक्ष वास्तुकार, मूर्तिकार जैसे कयी सारे मुख्य मंदिर और राज वंश की सेवा में संलग्न थे।