जिसके एक रोम कूप का प्रकाश करोड़ सूर्य तथा करोड़ चन्द्रमाओं की रोशनी से भी अधिक है।
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फलों के रस के साथ इसका प्रयोग करने से त्वचा के बंद रोम कूप खुल जाते हैं।
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ऐसा कर ने से चहरे के रोम कूप खुलते है जिससे चेहरा स्वस्थ्य और सुंदर होता है।
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जैसे ही ठण्डा तौलिया उसके उरोजों पर लगता उसके सारे शरीर में सिहरन सी दौड़ जाती और सारे रोम कूप खड़े से हो जाते।
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जब किसी कारणवश रोम कूप बंद हो जाते हैं तो कोशिकाओं की सफाई नहीं होने की वजह से कीटाणुओं का जन्म होकर संक्रमण शुरू हो जाता है।
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चेहरे पर मँहासे तब होते हैं, जब रोम कूप के अंदर के वसामय ग्रंथि बढ़ जाते हैं और अति त्वग्वसा एवं मृत कोशिकाओं के कारण भर जाते हैं।
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गोबर के लेप से शरीर का मर्दन करते हुए स्नान करने से रोम कूप खुल जाये, चमड़ी पर से किटाणु आदि का नाश हो जाये और साथ में एक्युप्रेशर-एक्युपंक्चर व मसाज भी हो जाये-ऎसा उद्देश्य भी हो सकता हैं.
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प्रत्येक रोम कूप के नीचे रोम कोशिका या पैपिला होती है यही पैपिला है जो रक्त धमनियों से पोषक तत्व ग्रहण करती है और नये बालों को जन्म देती है सामान्य व्यक्ति के 60 से 70 बाल रोजाना झड़ते हैं.
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ओर एक विशेष वात में आपको यहाँ बताना चाहूँगा की क्या इससे साधना में कोई सफलता ज्यादा मिलेगी, हाँ क्योंनाही जब शरीर से सारे रोम कूप खुले होने साफ होने तो इनके मध्यम से भी तो जप होता हैं ही
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प्रत्येक रोम कूप के नीचे रोम कोशिका या पैपिला होती है यही पैपिला है जो रक्त धमनियों से पोषक तत्व ग्रहण करती है नये बालों को जन्म देती है सामान्य व्यक्ति के 60 से 70 बाल रोजाना झड़ते हैं बालों में रूसी होना बालों के प्रति लापरवाही की निशानी है।