प्रेम और ईश्वर एक ही प्रकार की संकल्पनाएं हैं, यह कोई बॉलीवुडी सोच की तरह नहीं है कि जिज्ञासु व्यक्ति प्रेम के जरिए ही ईश्वर से साक्षात्कार कर पाते हैं, बल्कि ये दोनों तो व्यक्तिगत अनुभव के परिणाम हैं, जिन्हें वैज्ञानिक प्रयोग, वाग्विस्तार और प्रेक्षण के माध्यम से दूसरों के सामने साबित करना संभव नहीं है, फिर भी आस्तिक और प्रेमी दोनों के लिए उतना ही स्पष्ट होता है जितना कि दक्षिण अफ्रीका की ढलती सांझ के मद्धिम प्रकाश में दमकता डायन क्रूंगेर का गौर वर् ण.