जब भी किसी ज्योतिषीय शोध को किसी वैज्ञानिक संस्था को भेजा जाता है, तो वे कहते हैं कि यह विषय उनके विचार-क्षेत्र में आता ही नहीं है और फिर पुन:
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वे मन में भी एक प्रकार के व्यभिचार का पोषण करते हैं, विचार-क्षेत्र में एक प्रकार का अन्तर्जनन होता है, क्योंकि अलग-अलग धंधों में लगे और विभिन्न स्तरों पर जन्मे लोगों के बीच खुल कर बातचीत करने की बात खतम हो जाती है।
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धीरे-धीरे जब मनुष्य विचार-क्षेत्र में ऊँचे स्तर पर आ जाता है, तब वह जीवन में अधिक उदात्त होकर तथा अधिक ऊँची वस्तुओं में रुचि लेकर तुच्छ प्रकार के संघर्ष करना छोड़ देता है तथा अधिक उपयोगी दिशा में संघर्ष करना प्रारंभ कर देता है।
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सम्भव है, यह उनके राजनीतिक सिध्दांतों का फल हो ; क् यों कि उनकी शिक्षा, उनका प्रभुत्व, उनकी परिस्थिति, उनका स्वार्थ, सब इस प्रवृत्ति के प्रति प्रतिकूल था ; पर संयम और अभ्यास ने अब इसे उनके विचार-क्षेत्र से निकालकर उनके स्वभाव के अंतर्गत कर दिया था।
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जब भी किसी ज्योतिषीय शोध को किसी वैज्ञानिक संस्था को भेजा जाता है, तो वे कहते हैं कि यह विषय उनके विचार-क्षेत्र में आता ही नहीं है और फिर पुन: वैज्ञानिक वर्ग के लोग हमसे हमारे सिद्धांतों की वैज्ञानिकता का प्रमाण चाहते हैं, आखिर उन्हें प्रमाण दिया जाए तो कैसे?