जीवन में पाप, दु:ख और अनेक त्रुटियाँ मौजूद हैं सर्वेश्वरवाद के पास इसका कोई समाधान नहीं।
12.
अत: उत्तर वैदिक काल में सर्वेश्वरवाद का प्रचार हुआ, आत्मा-परमात्मा के अंश-अंशी संबंध का विवेचन हुआ।
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सर्वराष्ट्रीय मानव अधिकार घोषण सर्व-सेवा-संघ सर्वांगशोध या देहशोथ सर्वात्मवाद सर्वानुक्रमणी सर्विया सर्वेक्षण सर्वेश्वरवाद सलफ़्यूरिक अम्ल सल्फोेनिक अम्ल सल्फ़ोनेमाइड सवर्
14.
अंतर सिर्फ इतना है कि स्पिनोजा ‘ सर्वेश्वरवाद ' को सीधे-सीधे एक झटके में छू लेता है.
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ववाद या जड़समीहावाद सर्वराष्ट्रीय मानव अधिकार घोषण सर्व-सेवा-संघ सर्वांगशोध या देहशोथ सर्वात्मवाद सर्वानुक्रमणी सर्विया सर्वेक्षण सर्वेश्वरवाद सलफ़्यूरिक अम्ल सल्फोेनिक अम्ल
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सर्वेश्वरवाद इस प्रवृत्ति को इसके चरम बिंदु तक ले जाता है और कहता है कि बहुत्व की वास्तविक सत्ता है ही नहीं, यह आभासमात्र है।
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सर्वेश्वरवाद इस प्रवृत्ति को इसके चरम बिंदु तक ले जाता है और कहता है कि बहुत्व की वास्तविक सत्ता है ही नहीं, यह आभासमात्र है।
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हिन्दू धर्म का ‘ सर्वेश्वरवाद ' विश्व की दार्शनिक व्याख्या है 1 इसमें उस मानतम सत्ता को सर्वव्याप्त आत्मा माना है, जो कि मात्र विशालभाव रूप है, अतः नैतिक नियमों का आधार नहीं हो सकती।
19.
कुछ आधुनिक धर्म, आध्यात्मिकता को हर चीज़ में देखते हैं: देखें सर्वेश्वरवाद और नव-सर्वेश्वरवाद. ऐसी ही समान धारा में, धार्मिक प्रकृतिवाद का, प्राकृतिक दुनिया में दिखने वाले विस्मय, महिमा और रहस्य के प्रति एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण है.
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यथार्थतः राममोहन राय ने जिस एकेश्वरवाद का प्रतिपादन किया था, वह वैदिक, औपनिषदिक तथा वेदान्त दर्शन पर आधारित एक सर्वोच्च सच्चिदानन्द सत्ता को स्वीकार करना ही था, किन्तु वह शंकर के सर्वेश्वरवाद तथा मायाश्रित अद्वैतवाद से सर्वथा भिन्न था।