| 11. | अपने हमराह जो आते हो इधर से पहले
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| 12. | बहुत हमराह बनकर लूटते हैं राह में अक्सर,
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| 13. | अब चांद के हमराह निकलते नहीं वो लोग
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| 14. | हमराह कोई और न आया तो क्या गिला
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| 15. | मेरे हमराह भी रुसवाईयां हैं मेरे माज़ी की
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| 16. | मैं भी आपका हमराह हूँ, मित्र ।
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| 17. | मेरे नक्श-ए-पा पे चलकर हमराह गम हुए हैं।
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| 18. | मेरे हमराह कभी चांद, कभी तारे थे ।।
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| 19. | चीख, सह न सका, शायद,तभी आज़ हमराह हूँ।
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| 20. | मेरे हमराह भी रुसवाइयां हैं मेरे माजी की
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