स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ रिचा बताती हैं कि इस काम में जुड़ी महिलाओं का स्वास्थ्य खराब होना और उससे गर्भपात होना सामान्य-सी बात है।
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गर्भवती महिलाओं में आयोडिन की कमी से मृत शिशु का पैदा होना, गर्भपात होना और अन् य समस् याएं उत् पन् न हो सकती है।
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परिचयः बार-बार गर्भश्राव या गर्भपात होना अथवा जन्म के बाद ही कुछ ही दिनों में नवजात शिशु की मृत्यु हो जाये तो जन्म देने वाली माता को दोष दिया जाता है।
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3. संतान संबंधी समस्याएँ होना जैसे विवाह के सालों बाद संतान न होना, संतान हानि, गर्भपात होना या बीमार-अपंग संतान का होना व उससे माता-पिता को मानसिक कष्ट रहे।
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इससे धन की कमी, महिलाएँ व स्त्री संतान बीमार, परेशान, स्वभाव चिड चिड ा, मानसिक अशान्ति रहेगी, पुरूषों को गम्भीर बीमारी, भय लगना, मान-सम्मान व धन की कमी, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, संतान न होना व गर्भपात होना संभव है।
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इससे पुरूषों को गम्भीर बीमारी, भय लगना, मान-सम्मान व धन की कमी, कोर्ट-केस, प्रशासनिक समस्याएँ, संतान न होना व गर्भपात होना संभव है, धन की कमी, महिलाएँ व स्त्री संतान बीमार, परेशान, स्वभाव चिड चिड ा, मानसिक अशान्ति रहेगी।
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महिलाओं में बार-बार गर्भपात होना, लड़कियों का कम उम्र में वयस्क हो जाना, स्तन कैंसर की शिकायतों का बढ़ना, बच्चों की आंखें, फेफड़े व दिमाग में खराबी आदि की शिकायतों के पीछे ऐसा दूध ही कारण है ।।
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ब्लैडर कैंसर के कई कारण है, प्रॉस्टेट ग्रंथि का बढ़ना, मूत्रमार्ग में संकुचन होना, गर्भ के समय आने वाली समस्याएं, मूत्राशय में पथरी का होना, गर्भपात होना, किसी बीमारी के कारण इत्यादि ब्लैडर इंफेक्शन के जिम्मेदार है।
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इससे किसी स्त्री का गर्भधारण न करना, बार-बार गर्भपात होना, किसी बच्चे का शारीरिक व मानसिक अपंगता के साथ जन्म होना, किडनी फेल हो जाना या मनुष्य में किसी प्रकार के भय का होना आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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गर्भपात रोकना: हरी दूब (दूर्वा) का रस 10 ग्राम की मात्रा में मिश्री के साथ सुबह-शाम कुछ दिनों तक लगातार सेवन करने से अत्यार्त्तव (मासिक धर्म का अधिक आना) तथा बार-बार गर्भपात होना आदि का रोग ठीक हो जाता है।