मुँदी हुई पलकें, माथे का पल्ला खिसका हुआ, सिन्दूर से खूब भरी दमकती माँग के दोनों ओर कुछ लटें माथे पर बिखरी हुई, ज़रा टेढ़ी हो आई बिन्दी, कान का झाला गाल पर झिलमिलाता हुआ!
22.
इस बार वह तेज शुद्ध प्रकाश जैसा झिलमिलाता हुआ, दमकता सा और अत्यधिक चमक वाले सुनहरे रंग का विराट गोलाकार, जिसके बीच में गहरा नीला रंग दिखाई देता है, उस चैतन्य शून्यता का यही प्रत्यक्ष दर्शन होता है ।
23.
हमने देखा है | उस अगम दीप में ध्यान लगाने से झिलमिलाता हुआ प्रकाश दिखाई देता है | आचार्य श्री गरीब दास जी महाराज कहते हैं इसलिए इस शरीर रूपी काशी को खोजो जिस से तुम्हे इसमें रहने वाला नाश रहित (अविनाशी)
24.
उस पर उगे हुए छोटे-छोटे वृक्ष इस प्रकार दष्टिगोचर होते थे, मानो ये उसकी जटाएं है और अष्टभुजा देवी का मन्दिर जिसके कलश पर श्वेत पताकाएं वायु की मन्द-मन्द तरंगों में लहरा रही थीं, उस देव का मस्तक है मंदिर में एक झिलमिलाता हुआ दीपक था, जिसे देखकर किसी धुंधले तारे का मान हो जाता था।
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उस पर उगे हुए छोटे-छोटे वृक्ष इस प्रकार दष्टिगोचर होते थे, मानो ये उसकी जटाएं है और अष्टभुजा देवी का मन्दिर जिसके कलश पर श्वेत पताकाएं वायु की मन्द-मन्द तरंगों में लहरा रही थीं, उस देव का मस्तक है मंदिर में एक झिलमिलाता हुआ दीपक था, जिसे देखकर किसी धुंधले तारे का मान हो जाता था।
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उस पर उगे हुए छोटे-छोटे वृक्ष इस प्रकार दष्टिगोचर होते थे, मानो ये उसकी जटाएं है और अष्टभुजा देवी का मन्दिर जिसके कलश पर श्वेत पताकाएं वायु की मन्द-मन्द तरंगों में लहरा रही थीं, उस देव का मस्तक है मंदिर में एक झिलमिलाता हुआ दीपक था, जिसे देखकर किसी धुंधले तारे का मान हो जाता था।
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उस पर उगे हुए छोटे-छोटे वृक्ष इस प्रकार दष्टिगोचर होते थे, मानो ये उसकी जटाएं है और अष्टभुजा देवी का मन्दिर जिसके कलश पर श्वेत पताकाएं वायु की मन्द-मन्द तरंगों में लहरा रही थीं, उस देव का मस्तक है मंदिर में एक झिलमिलाता हुआ दीपक था, जिसे देखकर किसी धुंधले तारे का मान हो जाता था।
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थालियाँ भर बताशे लिये कामना हठरियाँ ज़िन्दगी की सजाने लगी आओ आशा की लड़ियों की झालर बना द्वार अपने ह्रदय के सजायें सभी द्वेष की हर जलन, दीप की लौ बने रागिनी प्रीत की गुनगुनायें सभी अंधविश्वास, अज्ञान, धर्मान्धता के असुरगण का फिर आज संहार हो झिलमिलाता हुआ ज्योत्सना की तरह हर तरफ़ प्यार हो और व्यवहार हो
29.
हास्यास्पद सुहावना उत्साह से भरा हुआ फल जैसा चमकदार झिलमिलाता हुआ यीस्टयुक्त इक्का नैतिक दृष्टि से उचित मोहित स्फुलित चटपटा झिलमिलाहट खमीर के समान गुस्से से पागल झक्की फल का जोश और उल्लास से युक्त काष्ठफलों के स्वाद वाला सठियाया हुआ काष्ठफलों के स्वाद वाला पुदीने की जाति का पौधा क्षुधावर्धक मसालेदार खाद्य बच्चों की गाड़ी फटा हुआ पागल यीस्ट के समान
30.
स्वतंत्रता दिवस की मंगल कामनाएं आदरणीया देवी नागरानी जी रहमत तेरी हरेक पे रब बेकराँ रहे अल्लाह मेरे मुल्क में अम्नो-अम्माँ रहे महफ़ूज हर बला से मेरा आशियाँ रहे फटके न पास दूर ही बर्के-तपाँ रहे चाहे जबाँ पे लाख तेरी बन्दिशें लगें खामोश लब यहाँ हों तो चर्चा वहाँ रहे दिन में हो धूप छाँव तो तारों भरी हो रात देवी यूं झिलमिलाता हुआ आसमाँ रहे बहुत ही सुंदर ग़ज़ल कही है ।