पति पत्नी के बिच झगड़े तनाव, विवाद, एक दूसरो क नापसंद करना और तलाक हर तरह के विवाह में होते है, वो जो सिर्फ माता पिता की मर्जी से हुए, उसमे भी जो माता पिता और बच्चो दोनों की मर्जी से हुए, उसमे भी जो केवल बच्चो की मर्जी से हुए और उनमे भी जिसमे कई सालो तक लिव इन रिलेशन के बाद विवाह हुए ।
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इस में कोई सन्देह नहीं कि इस से रोकना (इसकी अनुमति न देना), गलत धारणा के द्वार को बंद करना है, विशेष रूप से हमारे इस ज़माने में ; क्योंकि जब अधिकांश सहाबा व ताबेईन ने उन पवित्र और श्रेष्ठ युगों में जबकि उन के दिलों में ईमान पहाड़ों से भी अधिक था, इसे नापसंद किया है, तो उस का हमारे इस समय में-जो कि फित्नों (उद्रवों) और परीक्षणों का समय है-उस को नापसंद करना अधिक योग्य और उप्युक्त है।