साधारण गणित में मिश्रधन को इष्ट मानकर इष्टकर्म से मूलधन का पता करे, उसको मिश्रधन से घटाने पर कलान्तर यानी सूद या ब्याज समझना चाहिये, अपने अपने प्रमाण धन से अपने अपने फ़ल को गुणा करना उसमे अपने अपने व्यतीत काल और फ़ल के घात से भाग देना, लब्धि को पृथक रहने देना, उन सब में उन्ही के योग का पृथक पृथक भाग देना, तथा सबको मिश्रधन से गुणा कर देना चाहिये, फ़िर क्रम से प्रयुक्त व्यापार में लगाये हुये धन खण्ड के प्रमाण मालुम चलते है.