राष्ट्रीय कैलेंडर शक युग चैत्र के साथ अपनी पहली महीने के रूप में और 365 दिनों की एक सामान्य वर्ष के आधार पर 22 मार्च 1957 से अपनाया गया यह ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ में प्रयोग किया जाता है।
22.
आर्यभट्ट और उनके अनुयायियों द्वारा की गयी तिथि गणना पंचांग अथवा हिंदू तिथिपत्र निर्धारण के व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए भारत में निरंतर इस्तेमाल में रही हैं, इन्हे इस्लामी दुनिया को भी प्रेषित किया गया, जहाँ इनसे जलाली तिथिपत्र का आधार तैयार किया गया जिसे १ ० ७ ३ में उमर खय्याम सहित कुछ खगोलविदों ने प्रस्तुत किया, [24] जिसके संस्करण (१ ९ २ ५ में संशोधित) आज ईरान और अफगानिस्तान में राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में प्रयोग में हैं.