और किसी भी शिष्ट समाज की संरचना इस बात से तय होती है कि वह अपने बच्चों से कैसा बर्ताव करता है।
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और कोई भी शिष्ट समाज की संरचना इस बात से तय होती है कि वह अपने बच्चों से कैसा बर्ताव करता है।
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गालियाँ हमें मूलावस्था में जा पहुंचाती है-जहाँ कोई सोफेस्तिकेशन नहीं, क्रत्रिमता नहीं! पर शिष्ट समाज इसे अनुचित मानता है.
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पतंजलि के समय तक संस्कृत केवल शिष्ट समाज के व्यवहार की भाषा रह गई थी और प्राकृत ने बोलचाल की भाषा का स्थान ले लिया था।
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अश्लीलता का मानदंड शिष्ट समाज करता है जो अश्लीलता को पर्दे के पीछे ले जाता है और उसे ढांप-तोपकर रखता है और उसका मनमर्जी उपयोग करता है।
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परिणामस्वरूप संगीत द्वारा शिष्ट समाज, शुद्ध पर्यावरण, प्रदूषण मुक्त स्वस्थ मन और पुष्ट शरीर, तीव्र बुद्धि प्रखरता इत्यादि संगीत के माध्यम से सहज ही सुलभ हो जाते हैं।
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गे परेड ” इत्यादि भोंडे विदेशी बीमार प्रदर्शन न किये जाएँ और एक शिष्ट समाज के रूप में हमें कुछेक मामलो में अत्यंत सख्त होना ही पड़ेगा.
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पर पीछे दिल्ली राजधानी होने से रीतिकाल के भीतर ही खड़ी बोली शिष्ट समाज के व्यवहार की भाषा हो गई थी और उसमें अच्छे गद्य ग्रंथ लिखे जाने लगे थे।
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पर पीछे दिल्ली राजधानी होने से रीतिकाल के भीतर ही खड़ी बोली शिष्ट समाज के व्यवहार की भाषा हो गई थी और उसमें अच्छे गद्य ग्रंथ लिखे जाने लगे थे।
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यम अर्थात् अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह जहां विकासशील शिष्ट समाज के द्योतक हैं वहां नियम शौच, सन्तोष, तप, स्वाध्याय, और ईश्वर प्राणिधान व्यक्तिगत उत्कर्ष के नियंता हैं।