पौधों, शैवाल और अन्य प्रकाश संश्लेषक जैविक संरचनाओं में, लाइकोपेन पीले, नारंगी या लाल रंगद्रव्यों, प्रकाश संश्लेषण तथा प्रकाश संरक्षण के लिए जिम्मेदार बीटा कैरोटीन सहित अधिकांश कैरोटीनॉयड के जैविक संश्लेषण का एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ होता है.
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पौधों, शैवाल और अन्य प्रकाश संश्लेषक जैविक संरचनाओं में, लाइकोपेन पीले, नारंगी या लाल रंगद्रव्यों, प्रकाश संश्लेषण तथा प्रकाश संरक्षण के लिए जिम्मेदार बीटा कैरोटीन सहित अधिकांश कैरोटीनॉयड के जैविक संश्लेषण का एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ होता है.
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पौधों, शैवाल और अन्य प्रकाश संश्लेषक जैविक संरचनाओं में, लाइकोपेन पीले, नारंगी या लाल रंगद्रव्यों, प्रकाश संश्लेषण तथा प्रकाश संरक्षण के लिए जिम्मेदार बीटा कैरोटीन सहित अधिकांश कैरोटीनॉयड के जैविक संश्लेषण का एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ होता है.
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१८९८ ई. में अलबर्ट ए. माइकलसन और सैम्युअल डब्ल्यू. स्ट्रेटन ने एक प्रसंवादी संश्लेषक बनाया, जिसका सिद्धांत केलविन उपकर्णिका से इस बात में भिन्न है कि अवयवों का योग कुछ कमानियों से उत्पादित बलों के संकलन से होता है।
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यांत्रिक दृष्टि से यह उपकर्णिका केलविन प्रकार का दस अवयवी प्रसंवादी संश्लेषक है, जिसमें ज्या (sine) वाले अवयव जुड़कर एक पेंसिल को चलाते हैं और कोज्या (cosine) वाले अवयव अलग से जुड़ कर उस मेज को चलाते हैं जिसपर पेंसिल वक्र का अनुरेखण करती है।
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पौधों और प्रकाश संश्लेषक जीवाणु (बैक्टीरिया) स्वाभाविक रूप से ऑल-ट्रान्स लाइकोपेन का उत्पादन करते हैं, लेकिन शुद्ध रूप से अणु के कुल 72 ज्यामितीय विलगन (आइसोमर) संभव हो रहे हैं.[4] गर्मी या प्रकाश के संस्पर्श से लाइकोपेन इन सिस-आइसोमरों के किसी भी एक संख्या के विलगन की प्रक्रिया के तहत जा सकता है, जिसका आकार सीधा न होकर उसमें एक मोड़ हो सकता है.