इसी कड़ी में चोरी भी मानसिक व व्यावहारिक दोष से हुआ पापकर्म माना गया है, जो खासतौर पर आलस्य, दरिद्रता या कर्महीनता से जन्मे अभाव या स्वार्थ के हावी होने से होता है।
32.
इस प्रसंग में व्यावहारिक नजरिए से इशारा है कि श्री सुख और संपन्नता के लिए आलस्य, कर्महीनता या अहंकार को मन, वचन और कर्म में स्थान न देने के प्रति दृढ संकल्पित रहें।
33.
मनमोहन सिंह ने मुंबई में ऐसा कहा लेकिन सोनिया गांधी और उनकी बेटी प्रियंका और बेटा राहुल तो बाबरी मसजिद के ध्वंस में मजबूत नेता की असहायता और निपट कर्महीनता को लगातार निशाना बनाए ही हुए थे.
34.
आजादी के बाद हिंदू समाज कि प्रगति नहीं हो पा रही! और तो और, समाज की कर्महीनता के कारण अपने ही देश मैं हिंदू समाज की उचित मांगो को अनदेखा कर दिया जा रहा है!
35.
आजादी के बाद हिंदू समाज कि प्रगति नहीं हो पा रही! और तो और, समाज की कर्महीनता के कारण अपने ही देश मैं हिंदू समाज की उचित मांगो को अनदेखा कर दिया जा रहा है! अपने ही देश मै [..
36.
आत्म-त्याग की ऐसी आकांक्षा और शक्ति की कोई उपयोगिता गोरा ने नहीं देखी! उसे लोक-लज्जा की बेड़ियों में बँधी हुई कर्महीनता में फेंक देने से क्या देश की ज़रा भी हानि नहीं होगी? सुचरिता ने इस अवज्ञा को अस्वीकार करके दूर हटा दिया।
37.
हिन्दू समाज कर्महीन है, और कर्महीनता की लड़ाई स्वंम से शुरू होती है, यह समझ कर ही सुधार हो सकता है | जागो, आप दुबारा गुलामी की और बहुत तेजी से बढ़ रहे हो, और उसके जिम्मेदार आप स्वंम हैं, और कोइ नहीं!
38.
इस कथा में मिट्टी के सैनिकों में प्राण डालने के रुप में प्रतीकात्मक संदेश है कि उस समय मानसिक जड़ता और शारीरिक रुप से कर्महीनता के कारण शत्रुओं के आक्रमण से भयभीत लोगों में विश्वास और उनकी आत्म शक्ति को जगाना, जो आज के समाज के लिए भी एक प्रेरणा है।
39.
क्या यह हमारी कर्महीनता की नकरात्मक उर्जा का प्रभाव नहीं है, कि हम प्रजातंत्र के बाद भी, तथा जहां १०० % हिन्दुस्तान यह कह रहा है कि भ्रष्टाचार समाप्त करने हेतु तत्काल रचनात्मक कार्य होने चाहीये, भ्रष्टाचार बढता जा रहा है! पहला सन्देश ‘इन्द्र का सिंघासन डोल गया' से यही है!
40.
क्या इस सर्वनाशी भूमंडलीकरण ने सचमुच सबको इतना अकेला, इतना निहत्था और ऐसा विचार-शून्य बनाकर कर्महीनता की बर्फीली वादियों में धकेल दिया है कि हम उन नक़ली अस्तित्ववादी मुद्राओं-ऊब, अकेलेपन और संत्रास की गिरफ्त में आ गए हैं, जिसकी खिल्ली उड़ाया करते थे? वह नक़ल क्या आज असल बन रही है?