अपने इन्हीं गुणों के कारण अजवाइन कफ, वायु, पेट का दर्द, वायु गोला, आफरा तथा कृमि रोग को नष्ट करने में समक्ष है।
32.
अपनी भावनाओं को वह कृमि रोग, पुरुष प्रजनन अंगों के बारे में जानकारी, चकले में यौन दृश्यों और अपनी थेरेपिस्ट के साथ बातचीत के जरिए जाहिर करती हैं.
33.
गिनी कृमि रोग के कारण होता है इस परजीवी ड्रकुंकुलुस मेडिनेसिस और पीने के पानी के माध्यम से असुरक्षित स्रोतों से संचारित है जैसे कदम ठीक है, तालाबों युक्त संक्रमित पानी, आदि
34.
क्रिमिव्याधवपस्मारे घ्राणनाशे प्रेमहेके॥ (२ / ५) सिर का भारी होना, पीनस, माथे का दर्द, आधा शीशी, मिरगी, नासिका रोग, कृमि रोग तुलसी से दूर होते हैं ।
35.
पके अनन्नास के रस में छुहारा खुरासानी अजवायन और बायविडंग का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर, थोडे़ से शहद के साथ 5-10 ग्राम की मात्रा में चटाने से बालकों के कृमि रोग नष्ट होते हैं।
36.
पहला तरीका-अजवायन का सेवन कृमि रोग में अत्यंत ही लाभदायक होता है-अजवायन का चूर्ण आधा ग्राम लेकर समभाग गुड़ में गोली बनाकर दिन में तीन बार खिलाने से सभी प्रकार के पेट की कीड़े न ष्ट होते है
37.
कृमि-७० प्रतिशत बच्चों को कृमि रोग होता है ताज़ी हल्दी का आधा से एक चम्मच रस रोज़ पिलाने से बालकों के कृमि रोग दूर होते हैं अंजीर रात को भिगोकर सुबह खाली पेट खिलाने से भी कृमिरोग दूर होते हैं
38.
कृमि-७० प्रतिशत बच्चों को कृमि रोग होता है ताज़ी हल्दी का आधा से एक चम्मच रस रोज़ पिलाने से बालकों के कृमि रोग दूर होते हैं अंजीर रात को भिगोकर सुबह खाली पेट खिलाने से भी कृमिरोग दूर होते हैं
39.
सघन पशुधन विकास परियोजना के अन्तर्गत एक लाख 52 हजार 896 पशुओं का मु $ फ्त उपचार किया गया जबकि जिला के ग्रामीण क्षेत्रों में विभाग द्वारा 115 पशु चिकित्सा शिविर लगाए गए जिनमेंं बांझपन के 602 पशुओं का तथा कृमि रोग के 59 हजार 181 पशुओं का इलाज किया गया।
40.
इस पद्धति में बिना किसी दवा के रक्तस्राव, अस्थिचिकित्सा, शरीर के सभी टूटे हुये अंगों की शल्य चिकित्सा जुकाम, खांसी, मधुमेह, ज्वर, दमा, दस्त, मानसिक चिकित्सा, माइग्रेन, प्रजनन दोष, घावों और कृमि रोग आदि की चिकित्सा संभव हो जाती है।