किंतु कैल्सियम कार्बोनेट जैसे खनिज बहुत प्रचुर मात्रा में होने पर भी कुछ स्वाद नहीं देते और मैग्नीशियम के लवण अति अल्प मात्रा में भी स्वाद देने लगते हैं।
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किंतु कैल्सियम कार्बोनेट जैसे खनिज बहुत प्रचुर मात्रा में होने पर भी कुछ स्वाद नहीं देते और मैग्नीशियम के लवण अति अल्प मात्रा में भी स्वाद देने लगते हैं।
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समुद्री अम्लीयकरण के चलते समुद्री जीवों के कैल्सीकरण में कमी और समुद्र में कैल्सियम कार्बोनेट के घुलने में बढ़ोतरी से क्या कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़ती मात्रा पर रोक नहीं लगेगी?
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एक ही स्थान पर बूँदों के बारंबार टपकने ओर उसी स्थान पर कैल्सियम कार्बोनेट के निरंतर अवक्षेपण से एक स्तंभाकर राशि बन जाती है, जिसे स्टैलेक्टाइट (Stal actite) कहते हैं।
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इस प्रकार कार्बन ग्रैफाइट (षष्ट्कोणीय) और हीरा (त्रिसमलंबाक्ष) के रूप में, तथा कैल्सियम कार्बोनेट, कैल्साइट (षट्कोणाक्ष) और ऐरोगोनाइट (विषमलंबाक्ष) के रूप में मिलता है।
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कैल्सियम कार्बोनेट की इन भव्य शैलश्रेणियों का निर्माण प्रवालों में प्रजनन अंडों या मुकुलन (budding) द्वारा होता है, जिससे कई सहस्र प्रवालों के उपनिवेश मिलकर इन महान आकार के शैलों की रचना करते हैं।
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समुद्री अम्लीयकरण के चलते समुद्री जीवों के कैल्सीकरण में कमी और समुद्र में कैल्सियम कार्बोनेट के घुलने में बढ़ोतरी से क्या कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़ती मात्रा पर रोक नहीं लगेगी? ऐसा होगा लेकिन यह इतने धीमे होगा कि महासागरों के अम्लीयकरण के प्रभाव हमें कई सदियों तक झेलने होंगे।
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खनिज लवण:-अर्जुन छाल में 34 % के लगभग तो अकेला कैल्सियम कार्बोनेट ही पाया जाता है | इसके अतिरिक्त इसमें सोडियम, पोटेशियम, मैग्नेशियम और एल्युमिनियम आदि अन्य क्षार भी पाए जाते है | इन्हीं खनिज लवण की प्रयाप्त उपलब्धता के कारण ही अर्जुन छाल ह्रदय की मांसपेशियों में सूक्ष्म स्तर पर कार्य करके अपना औषधीय प्रभाव प्रकट करती है |
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कीटों तथा हाइड्रा (hydra) वर्गों में कठोर भाग ऐसे पदार्थ के होते हैं जिसे काइटिन कहते हैं, अनेक स्पंज और डायटम (diatom) बालू के बने होते हैं, कशेरुकी की अस्थियों में मुख्यत: कैल्सियम कार्बोनेट और फ़ॉस्फेट होते हैं, प्रवालों (coral), एकाइनोडर्माटा (Echinodermata), मोलस्का (mollusca) और अनेक अन्य प्राणियों में तथा कुछ पादपों में कैल्सियम कार्बोनेट होता है और अन्य पादपों में अधिकांशत: काष्ठ ऊतक होते हैं।
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कीटों तथा हाइड्रा (hydra) वर्गों में कठोर भाग ऐसे पदार्थ के होते हैं जिसे काइटिन कहते हैं, अनेक स्पंज और डायटम (diatom) बालू के बने होते हैं, कशेरुकी की अस्थियों में मुख्यत: कैल्सियम कार्बोनेट और फ़ॉस्फेट होते हैं, प्रवालों (coral), एकाइनोडर्माटा (Echinodermata), मोलस्का (mollusca) और अनेक अन्य प्राणियों में तथा कुछ पादपों में कैल्सियम कार्बोनेट होता है और अन्य पादपों में अधिकांशत: काष्ठ ऊतक होते हैं।