यह परिषद बाजार अनुसंदान करने, अंतर्राष्ट्रीय श्रम बाजार में रोजगार के अवसरों का पता लगाने, बाजार में मांग को देखते हुए कौशल विकसित करने, गतिशील अंतरराष्ट्रीय श्रम बाजार के प्रत्युत्तर में नीतियां तय करने और वैश्वीकरण के जनसांख्यिक लाभों को भारतीय प्रवासियों तक पहुचानें के लिए “ थिंक टैंक ” यानी वैचारिक संगठन के रूप में कार्य करेगी।
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कोकराझाड़, चिरांग, बंगाईगांव, धुबरी और ग्वालपाड़ा से स्थानीय बोडो आदिवासियों को हिंसा के बल पर खदेड़ भगाने वाले अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं, जिनके कारण न केवल असम के जनसांख्यिक स्वरूप में तेजी से बदलाव आया है, बल्कि देश के कई अन्य भागों में भी बांग्लादेशी अवैध घुसपैठिए कानून एवं व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।