जब अल्लाह इंसान के रगे गर्दन के क़रीब रहता है और दिलों की बातें जानता है तो उसने बन्दों के दाएँ बाएँ अख्ज़ करने वाले फरिश्तों को अपनी मुलाज़मत में क्यूँ रख छोड़े है?
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टेक में गोल्ड मेडलिस्ट हैं, वह एक बहुत मशहूर अमरीकी कम्पनी में काम कर रही थीं, उनको दो साल पहले, जब मुलाज़मत छोडी है एक लाख अठारह हज़ार रूपए तन्खाह मिलती थी।
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मुझे अफसोस सिर्फ़ इस बात का है कि इसके बावजूद कुछ लोगों ने भारतीय उच्चायुक्त को मेरे ख़िलाफ शिकायतनामें भेजे कि सरकार की मुलाज़मत में रहते हुए मुझे हिन्दी के प्रचार और प्रसार के लिए काम नहीं करना चाहिए।
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टेक किया, बंगलौर मैं विप्रो एक साफ्टवेयर की मशहूर कम्पनी है, इसी में मुझे मुलाज़मत मिल गयी है, उसी में काम करता हूं, अल्लाह का शुक्र है बहुत फरावानी का रोज़गार अल्लाह ने मुझे दे रखा है।
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आज के दौर में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, नारी उत्पीड़न विरोधी मंच, उपभोक्ता मंच, पारिवारिक कल्याण प्रकोष्ठ, गली-मोहल्ला सुधार मंच, स्वदेशी अपनाओ मंच आदि विभिन्न प्रकल्पों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव समेत सवा सत्ताईस पदाधिकारियों और सैकड़ों सदस्यों की फ़ौज ही रसूख़दारों की मुलाज़मत में इसीलिए होती है ताकि ठाठ-बाट बना रहे ।
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आज के दौर में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, नारी उत्पीड़न विरोधी मंच, उपभोक्ता मंच, पारिवारिक कल्याण प्रकोष्ठ, गली-मोहल्ला सुधार मंच, स्वदेशी अपनाओ मंच आदि विभिन्न प्रकल्पों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव समेत सवा सत्ताईस पदाधिकारियों और सैकड़ों सदस्यों की फ़ौज ही रसूख़दारों की मुलाज़मत में इसीलिए होती है ताकि ठाठ-बाट बना रहे ।
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अहमदः इतनी बडी तन्खाह छोडने पर राज़ी हो गयीं? जावेदः जिस बडी चीज़ के लिए मुलाज़मत छोडी है, यह तन्खाह उसके पासंग में भी नहीं आयेगी, उन्होंने यह मुलाज़मत अपने रब अहकमुल हाकिमीन का हुक्म मानने के लिए छोडी है, अब आप बताईये कि अल्लाह के हुक्म के आगे यह एक लाख रूपए महीना की तन्खाह क्या हैसियत रखती है?
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अहमदः इतनी बडी तन्खाह छोडने पर राज़ी हो गयीं? जावेदः जिस बडी चीज़ के लिए मुलाज़मत छोडी है, यह तन्खाह उसके पासंग में भी नहीं आयेगी, उन्होंने यह मुलाज़मत अपने रब अहकमुल हाकिमीन का हुक्म मानने के लिए छोडी है, अब आप बताईये कि अल्लाह के हुक्म के आगे यह एक लाख रूपए महीना की तन्खाह क्या हैसियत रखती है?