इसी तरह दाँत में दर्द होने पर जायफल के तेल में रूई का फाहा डुबोकर इसे दाँत-दाढ़ के कोचर में रखने से कीड़े मर जाते हैं और दर्द दूर हो जाता है।
32.
आठवें दिन कपड़े से छानकर शीशी में भर लें इसमें रूई का फाहा भिगोकर योनि में अंदर चारों तरफ लगाने से योनि की शिथिलता, विस्तीर्ण तथा दीर्घमुख होने की स्थिति दूर होती है।
33.
आंखों पर ठंडे पानी से भींगे रूई के फाहे रखें. करवट लेकर पेट के बल लेट जाएं. ठंडी रूई का फाहा गर्दन पर रखें. आपकी सारी थकान दूर हो जाएगी.
34.
ओह, क्या अचंभा है, मैं यहां से भी देख सकता हूं आकाश आकाश मे चांद चांद में बैठी हुई बुढ़िया का चरखा चरखे के आस-पास सफ़ेद खरगोश सा रूई का फाहा और तकली में लिपटता हुआ महीन सा सूत.
35.
नाप सरकना या नाभि डिगना-यदि नाप सरक जाये तो सरसों के तेल की 2. 1 बूदे नाभि में डालकर लेट जायें अथवा रूई का फाहा तेल में भिगोंकर नाभि पर आवश्यकतानुसार रखने से नाप ठीक हो जाती है।
36.
यदि गर्भाशय शीतल (ठंडा) हो गया तो बच, काला जीरा, और असगंध इन तीनों को सुहागे के पानी में पीसकर उसमें रूई का फाहा भिगोकर तीन दिनों तक योनि में रखने से उसकी शीतलता दूर हो जाती है।