लेकिन न्यूमोनिया से लेकर ल्यूपस तक कई बीमारियां ऐसी हैं जिनकी वजह से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और इसका पता भी नहीं चल पाता।
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कई असाध्य रोग जैसे अस्थमा, एल्ज़ीमर्स, मल्टीपल स्कीरोसिस, डिप्रेशन, पार्किनसन्स, ल्यूपस नेफ्राइटिस, एड्स, स्वाइन फ्लू आदि का भी उपचार करती है अलसी।
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डा. शाह कहते हैं कि ल्यूपस के मरीजों की संख्या हालांकि बहुत कम है, लेकिन चिंताजनक बात यह है कि लोग इस बीमारी के बारे में नहीं जानते।
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यदि चक्रीय न्यूट्रोपेनिया का संदेह होता है तो क्रमिक नयूट्रोफिल गणना, एंटीनयूट्रोफिल प्रतिरक्षी के लिए जांच, ऑटोएंटीबॉडी स्क्रीन और सिस्टेमिक ल्यूपस एरीथीमेटोसस, विटामिन बी12 और फोलेट एसेज के लिए जांच और ऐसीडीफाइड सीरम (हैम'स) परीक्षण.
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अलसी त्वचा की बीमारियों जैसे मुहांसे, एग्ज़ीमा, दाद, खाज, सूखी त्वचा, खुजली, छाल रोग (सोरायसिस), ल्यूपस, बालों का सूखा व पतला होना, बाल झड़ना आदि में काफी असरकारक है।
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नाक से सम्बंधित लक्षण-नाक से बदबूदार स्राव का आना, बूढ़े लोगों को होने वाला पुराना जुकाम, तीखा कच्चापन, ल्यूपस आदि जैसे नाक के रोगों के लक्षणों में रोगी को क्रियोजोटम औषधि का सेवन कराना लाभदायक रहता है।
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त्वचा, केश और नाखून के हर रोग जैसे मुहांसे, एग्ज़ीमा, दाद, खाज, खुजली, सूखी त्वचा, सोरायसिस, ल्यूपस, डेन्ड्रफ, बालों का सूखा, पतला या दोमुंहा होना, बाल झड़ना आदि का उपचार है अलसी।
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ल्यूपस तंत्रिकाओं की एक खतरनाक बीमारी है जो धीरे-धीरे शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करती है लेकिन चिकित्सा जगत की उन्नत तकनीक के बावजूद इस बीमारी का पता चलने में महीनों लग सकते हैं, और इसके घातक परिणाम सामने आ सकते हैं।
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इसमें कोरोनरी धमनी में जन्मजात असामान्यता, हायपरकोगुलिटी (खून का थक्का बनने की दर असामान्य रूप से बढ जाना), कोलेजेन वैस्कुलर रोग, जैसे-रयूमेटॉइड अर्थराइटिस या सिस्टेमिक ल्यूपस इरिथेमैटोसस (एसएलई या ल्यूपस), कोकीन सेवन, कोरोनरी धमनी में ऐंठन या कोरोनरी धमनी में तैरता या जमा हुआ इंबोलस (खून का छोटा थक्का, जो रक्त परिसंचरण तंत्र में घूमता रहता हो) आदि के कारण होनेवाला हृदयाघात शामिल है।
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इसमें कोरोनरी धमनी में जन्मजात असामान्यता, हायपरकोगुलिटी (खून का थक्का बनने की दर असामान्य रूप से बढ जाना), कोलेजेन वैस्कुलर रोग, जैसे-रयूमेटॉइड अर्थराइटिस या सिस्टेमिक ल्यूपस इरिथेमैटोसस (एसएलई या ल्यूपस), कोकीन सेवन, कोरोनरी धमनी में ऐंठन या कोरोनरी धमनी में तैरता या जमा हुआ इंबोलस (खून का छोटा थक्का, जो रक्त परिसंचरण तंत्र में घूमता रहता हो) आदि के कारण होनेवाला हृदयाघात शामिल है।