(1) प्रेरक (motor) वाचाघात में रोगी केवल स्पष्ट रूप से बोल नहीं सकता, पर बोलते समय काम में आनेवाली मांसपेशियों में किसी प्रकार का विकार नहीं होता।
32.
संगीत चिकित्सा प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों ने नियंत्रित समूहों की तुलना में रोजमर्रा की मोटर गतिविधियों में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया. [21] विल्सन, पार्सन्स, और रियूटन्स ने गहन ब्रोका वाचाघात (
33.
अफेजिया (वाचाघात) के लक्षण इसकी शुरुआत प्रायः अचानक होती है और शरीर के आधे भाग (दायें हाथ तथा दायें पैर) के लकवे के साथ होती है।
34.
वाचाघात के निदान के लिए नाड़ीमंडल की पूर्ण परीक्षा करनी चाहिए तथा इस बात का पता लगाना चाहिए कि रोगी दाहिने हाथ से काम करता है अथवा बाएँ हाथ से।
35.
अर्बुद और रक्तस्रावजन्य वाचाघात को छोड़कर अन्य कारणों से उत्पन्न वाचाघात में रोग के अच्छे होने की अधिक संभावना रहती है, परंतु प्रत्येक अवस्था में रोग का पुनराक्रमण हो सकता है।
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अर्बुद और रक्तस्रावजन्य वाचाघात को छोड़कर अन्य कारणों से उत्पन्न वाचाघात में रोग के अच्छे होने की अधिक संभावना रहती है, परंतु प्रत्येक अवस्था में रोग का पुनराक्रमण हो सकता है।
37.
वाचाघात (Aphasia) मस्तिष्क की ऐसी विकृति है जिसमें व्यक्ति के बोलने, लिखने तथा बोले एवं लिखे हुए शब्दों को समझाने या प्रकट करने में अनियमितता, अस्पष्टता, एवं स्थायी विकार उत्पन्न हो जाता है।
38.
मस्तिष्क में रक्त के संचरण में बाधा आने से, कुछ समय के लिए अरक्तता की स्थिति पनपती है, जिसके कारण हाथपैरों में अस्थायी सुन्नता आ जाती है, जिससे पक्षाघात या वाचाघात जैसा लगता है।
39.
जब दिमाग के बायें आधे गोले में पक्षाघात का अटैक या अन्य रोग आता है तो शरीर के दायें आधे भाग में लकवे के साथ-साथ बोली भी चली जाती है, अफेजिया / वाचाघात होता है।
40.
(6) चेष्टा अक्षमता (apraxia) तथा प्रत्यक्ष अक्षमता वाचाघात (agnosia) में चेष्टा अक्षमता के अंतर्गत रोगी कुछ क्लिष्ट कार्य, जैसे बटन लगाना इत्यादि, नहीं कर पाता तथा प्रत्यक्ष अक्षमता में रोगी सामान्य चीजों का ठीक व्यवहार नहीं कर पाता।