सुर्ख सुबह शाम सुहानी चाहिए ।जिंदगी भर खींचा-तानी चाहिए॥काट कर पर्वत भगीरथ की तरहकाम की गंगा बहानी चाहिए ॥कल जहाँ रुकते थे प्यासे काफिलेअब उसी दरिया को पानी चाहिए॥सींच डाले जो ज़मीं को खून से, इस धरा को वो जवानी चाहिए ॥मंदिरों में क़ैद ईश्वर को 'मनोज'ख...
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खींचा-तानी में उसकी पेंट फट गई! दोनों दुम दबा कर भाग गए! और जब जिमी बीमार हुआ था तो पुरु ने खाना-पीना तक छोड दिया था! स्कूल से आने के पश्चात स्वयं डाक्टर के पास लेकर जाता! जब तक वो भला-चंगा नहीं हो गया पुरु को चैन नहीं आया!
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जीवन धारा बड़ी अपारा जिसने खींचा-तानी की उसी को इसने दे मारा जीते-जीते वर्षों हो गए मरते कटते अर्शों हो गए खूब मचाई तिगदम-तिगडी किस्मत बन-बन के बिगड़ी हो चला है जीवन झुरमुट अब चल कहीं को उठ उठ उठ बता की अब तक क्या-क्या जीता? बता की अब तक क्या-क्या हारा? जीवन धारा बड़ी अपारा ….
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गपिल ने मानसी को पीछे से पकड़ कर उसके कुरते में हाथ डाल कर उसकी चूचियों पर रंग लगा दिया और उसका कुरता जोर से पकड़ कर खींचा, उसी समय मानसी गपिल की पकड़ छुड़ा कर भागी और इस खींचा-तानी में मानसी का पूरा कुरता चर्र से फट गया और पूरा का पूरा गपिल के हाथ में आ गया।
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ज्ञान के अपने दो समकालीन-मित्रों ने कुछ वर्ष पहले अच्छा-ख़ासा स्मृति-प्रपंच रचा था, जिसमें उनके अपने-अपने स्वभावों के अनुरूप काफ़ी कुछ ट्रैजी-कॉमिक, स्वाँग-विद्रूप का लुत्फ़ था, अगर उससे आप लुत्फ़ ले सकते तो, हद तक कि ज्ञान को गज-ग्राह की इस खींचा-तानी में हस्तक्षेप करना पड़ा था, जैसा कि इनमें से एक को लिखे गये पत्र से प्रकट होता है।