ठीक उसी समय एक औरत अपने जानवर के चारा लेकर आ रही थी | उस दृश्य को देखकर वो बोलने लगी-अरे जाने दे इसे, कुछ नहीं होगा थोड़ी देर में वापस आ जायेगा | पर ग्रामीण लोग ने अनसुना करके पहले जल्दी से बालक को ऊपर खीच लिया | फिर सोचा ये हुँकार भरी आवाज का क्या करें? जिससे ग्रामीण बहुत ज्यादा डरा, सहमा सा महसूस कर रहे थे |
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रामरतन भी भावुक हो गया, बोला....अरे भौजी जैसे यह तुमरा बेटवा वैसे ही हमरा भी है न......उ त कहो कि संजोग से एक दिन बाजार में हमरा ई भेट गया और जब एकर दुःख हम देखा तो हमरा कलेजा दरक गया.हम बीच बीच में एकरा से भेंट करते रहते थे और जब लगा कि बचवा मर जाएगा तो हम चुप्पेचाप एकरा लेकर इहाँ भाग आए....अब धीरज धरो, मुदा मालिक को पता चले ई से पहले जल्दी से एकरा इहाँ से कहीं बाहर भेज दो.हम भी निकलते हैं,नही तो मालिक के पता लग जाएगा तो हमरा खाल खिंचवा देंगे.