यहाँ तक तो हमने इस पहेली की उधेड़-बुन दार्शनिक ढंग से की।
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ने मानवता के विभिन्न अंगों पर दार्शनिक ढंग से प्रकाश डाला और इब्रुल फारिज़ (मृ.1235 ई.)
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ने मानवता के विभिन्न अंगों पर दार्शनिक ढंग से प्रकाश डाला और इब्रुल फारिज़ (मृ.1235 ई.)
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क्योंकि इस मत के मानने से दार्शनिक ढंग से पदार्थों का निर्माण सिद्ध किया जा सकना असंभव जँचा।
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इसलिए सुंदरकांड में तुलसीदासजी ने रावण और उसके गुप्तचरों के संवाद को बड़े दार्शनिक ढंग से लिखा है।
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इसी आधार पर मैं कह रहा था कि सीबीआई के छापों को दार्शनिक ढंग से देखे जाने की जरूरत है।
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पुरुषों के बहुविवाह की प्रथा से उत्पन्न प्रेममार्ग की व्यावहारिक जटिलता को जिस दार्शनिक ढंग से कवि ने सुलझाया है वह ध्या्न देने योग्य है।
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कभी दार्शनिक ढंग से प्रकाश कहता, “ रश्मि तुमने कभी सोचा है कि इस दुनिया में कौन, कितने दिन किसी का साथ देता है? ”
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जिन्दगी कहाँ छुपी है? इस सवाल का सामना करने का साहस आने से पहले ही मौत आ जाती है, नर्स ने बड़े दार्शनिक ढंग से सोचना चाहा।
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इसी प्रकार अबुल अला अलमअर्रो (मृ. सन् 1057 ई.) ने मानवता के विभिन्न अंगों पर दार्शनिक ढंग से प्रकाश डाला और इब्रुल फारिज़ (मृ.1235 ई.) ने आध्यात्मिकता के वायुमंडल में उड़ान भरी।