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सर्वानुक्रमणी वाक्य

उच्चारण: [ servaanukermeni ]
उदाहरण वाक्यमोबाइल
  • सर्वानुक्रमणी के प्रणेता कात्यायन ने ग्रंथारंभ में “यथोपदेश मैं ऋग्वेद की ऋचाओं के प्रतीक आदि की अनुक्रमणी प्रस्तुत करता हूँ” ऐसी प्रतिज्ञा की है।
  • कात्यायन की ‘ सर्वानुक्रमणी ‘ या ‘ सर्वानुक्रमणिका ‘ इन ऋषियों के नामों का मूल स्त्रोतमानी गयी है (कुछ अन्य अनुक्रमणियों के अलावा।
  • लेकिन यह दलील देकर प्रश्नों से बचा नहीं जा सकता, यदि आप सर्वानुक्रमणी को विश्वसनीय नहीं मानते तो उसका सन्दर्भ देते ही क्यों हैं?
  • ऋग्वेद से संबद्ध “अनुक्रमणी साहित्य” में, विशेषत: बृहद्देवता और सर्वानुक्रमणी में, निरुक्त, नीतिमंजरी और सायण भाष्य में इन आख्यानों को विस्तृत घटनाओं का भी वर्णन हुआ है।
  • ऋग्वेद से संबद्ध “अनुक्रमणी साहित्य” में, विशेषत: बृहद्देवता और सर्वानुक्रमणी में, निरुक्त, नीतिमंजरी और सायण भाष्य में इन आख्यानों को विस्तृत घटनाओं का भी वर्णन हुआ है।
  • इसीलिए तैत्तरीय संहिता, ऐतेरय ब्राह्मण, काण्व संहिता, शतपथ ब्राह्मण एवं सर्वानुक्रमणी में मंत्रों के दृष्टाओं को ही ऋषि नाम से सम्बोधित किया गया है तथा अनेक प्रमाण दिए हैं।
  • ९ ८ को देखें तो उस में-‘ च ‘ (और) का प्रयोग मिलेगा, जहाँ सर्वानुक्रमणी में कात्यायन ‘ वा ‘ का प्रयोग करते हैं।
  • सर्वानुक्रमणी में ऋग्वेद ९. ६६-‘ पवस्व ‘ सूक्त के १ ०० ‘ वैखानस ‘ ऋषि हैं, जबकि सूक्त में मन्त्र ही केवल ३ ० हैं।
  • इसीलिए तैत्तरीय संहिता, ऐतेरय ब्राह्मण, काण्व संहिता, शतपथ ब्राह्मण एवं सर्वानुक्रमणी में मंत्रों के दृष्टाओं को ही ऋषि नाम से सम्बोधित किया गया है तथा अनेक प्रमाण दिए हैं।
  • सर्वानुक्रमणी (परिभाषा २. ४) में स्पष्ट रूप से मन्त्र का ‘ दृष्टा ‘ या मन्त्र के अर्थ का ‘ ज्ञाता ‘ ही, उस का “ ऋषि ” है।
  • कात्यायन प्रणीत सर्वानुक्रमणी की संज्ञा का निर्वचन किया है-“सर्वज्ञेयार्थ वर्णनात् सर्वानुक्रमणीशब्दं निर्बुवंति विपश्चित: ” कात्यायन ने एक सर्वानुक्रमणी ऋग्वेद की शाकल एवं वाष्कल संहिता की बनाई और दूसरी शुक्ल यजुर्वेद की वाजसनेयि संहिता की।
  • कात्यायन प्रणीत सर्वानुक्रमणी की संज्ञा का निर्वचन किया है-“सर्वज्ञेयार्थ वर्णनात् सर्वानुक्रमणीशब्दं निर्बुवंति विपश्चित: ” कात्यायन ने एक सर्वानुक्रमणी ऋग्वेद की शाकल एवं वाष्कल संहिता की बनाई और दूसरी शुक्ल यजुर्वेद की वाजसनेयि संहिता की।
  • शुक्लयजुर्वेदीय सर्वानुक्रमणी का प्रकाशन वेबर द्वारा संपादित यजुर्वेद के संस्करण में परिशिष्ट रूप से संगृहीत है, तथा स्वतंत्र रूप से यह ग्रंथ सभाष्य बनारस संस्कृत सीरीज़ के अंतर्गत ईसवी सन् 1893-94 में सर्वप्रथम प्रकाशित हुआ मिलता है।
  • जैसे, सर्वानुक्रमणी-ऋग्वेद ९. १ ० ६-चौदह मन्त्रों वाले ‘ इन्द्र्मच्छ ‘ सूक्त में-‘ चक्षुषा ‘ ने ३, ‘ मानव चक्षु ‘ ने ३, ' अप्स्व चक्षु ‘ ने ३ और ‘ अग्नि ‘ ने ५ मन्त्रों के अर्थ अपनी तपस्या से जानें।
  • B. कुछ लोग यह दलील दे सकते है कि सर्वानुक्रमणी के लेखक कात्यायन के समय तक ऐतिहासिक परम्परा टूट चुकी थी इसलिये उन्होंने एक मन्त्र के साथ अनेक ऋषियों के नाम ‘ वा ‘ (या) का प्रयोग करते हुए जोडे कि-इनमें से किसी एक ने यह मन्त्र बनाया है।
  • कात्यायन ने स्वयं भी सर्वानुक्रमणी में ‘ वा ‘ का उपयोग विभिन्न सन्दर्भों में किया है-परिभाषा प्रकरण में वह स्पष्ट लिखते हैं कि-जब ‘ वा ‘ का उपयोग करके किसी ऋषि का नाम दिया जाता है तो इसका अर्थ है कि पहले ऋषि के उपरांत इस ऋषि ने भी इस वेद मन्त्र को जाना था।
  • अधिक वाक्य:   1  2

सर्वानुक्रमणी sentences in Hindi. What are the example sentences for सर्वानुक्रमणी? सर्वानुक्रमणी English meaning, translation, pronunciation, synonyms and example sentences are provided by Hindlish.com.