शरीर में तन्तुजाल के रूप में गुछे पाए जाते हैं उसी प्रकार जीव के रूप में
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साधक का मन आगे बढना चाहे, तो भी द्वार नहीं मिलता और यह उसी चक्र के तन्तुजाल की भूलभुलैयों में उलझा रह जाता है।
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वो उपन्यास है प्रख्यात समाजवादी चिंतक, आलोचक एवं भूतपूर्व अध्यक्ष,हिन्दी विभाग इलाहाबाद युनिवर्सिटी मेरे गुरु डा0 रघुवंश जी का उपन्यास ‘ तन्तुजाल ' ।रघुवंश जी के ‘ तन्तुजाल ' का नायक भी ट्रेन की लम्बी यात्रा में है।
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वो उपन्यास है प्रख्यात समाजवादी चिंतक, आलोचक एवं भूतपूर्व अध्यक्ष,हिन्दी विभाग इलाहाबाद युनिवर्सिटी मेरे गुरु डा0 रघुवंश जी का उपन्यास ‘ तन्तुजाल ' ।रघुवंश जी के ‘ तन्तुजाल ' का नायक भी ट्रेन की लम्बी यात्रा में है।