जब हम किसी घटना को सुनते हैं तो वो हमारे दिमाग़ पर अंकित हो जाते हैं और जब हम किसी घटना को सुनते हैं या देखते हैं उसका संकेत हमारे मस्तिष्क तक चला जाता है, मस्तिष्क अपने पास संग्रहित अनुभवों से उस घटना का मिलान करता है तब कोई निर्णय लेता है यही निर्णय व्यक्ति को आभास या पूर्वभास के रूप में महसूस करता है..
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जब हम किसी घटना को सुनते हैं तो वो हमारे दिमाग़ पर अंकित हो जाते हैं और जब हम किसी घटना को सुनते हैं या देखते हैं उसका संकेत हमारे मस्तिष्क तक चला जाता है, मस्तिष्क अपने पास संग्रहित अनुभवों से उस घटना का मिलान करता है तब कोई निर्णय लेता है यही निर्णय व्यक्ति को आभास या पूर्वभास के रूप में महसूस करता है..
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क्या होता है सही में पूर्वाभास? ज़िंदगी में अक्सर हमे पूर्वभास होने लगता है.किसी का ख़्याल अचानक से आ जाता है, संसार में जो कुछ होता है उसके पीछे कुछ ना कुछ कारण ज़रूर होता है....देह चंदन महक, सांस में मोगरा भीनी गंधें प्रणय रच रही हैं प्रिये, आइये आज प्रीत के तरही मुशायरे को आगे बढ़ाते हुए सुनते हैं श्री राजेंद्र स्वर्णकार से उनकी ग़ज़ल छोटी सी दुनिया ही नसीब है..
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अगर हम सब बातों पर गौर करे तो जैसी जिसकी विचार धारा है वैसा ही प्रभाव सब चीज़ो पर पड़ता है अगर आकरण ही कोई पूर्वभास हो या आभास हो तो यो इसको गंभीरता से लेना चाहिए हो सकता हैं, इस में हमारे अपने भविष्य के लिए कोई संकेत छिपा हो,आज विज्ञान इतनी तरक्की के बाद भी मस्तिष्क की सरंचना को पूरी तरह से समझ नही पाया है अभी भी बहुत समझना बाक़ी है इस संबंध में और प्रयास भो होते रहेंगे और जानकारी मिल सकेगी!!
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अगर हम सब बातों पर गौर करे तो जैसी जिसकी विचार धारा है वैसा ही प्रभाव सब चीज़ो पर पड़ता है अगर आकरण ही कोई पूर्वभास हो या आभास हो तो यो इसको गंभीरता से लेना चाहिए हो सकता हैं, इस में हमारे अपने भविष्य के लिए कोई संकेत छिपा हो, आज विज्ञान इतनी तरक्की के बाद भी मस्तिष्क की सरंचना को पूरी तरह से समझ नही पाया है अभी भी बहुत समझना बाक़ी है इस संबंध में और प्रयास भो होते रहेंगे और जानकारी मिल सकेगी!!