बच्चों के साथ मुँह-अँधेरे ही उठकर उस पेड़ के नीचे सींकरि खोजने जाता था।
12.
सुबह मुँह-अँधेरे उठकर स्कूल जाने के समय से ही दोनों भाई-बहन कुनमुना रहे थे।
13.
आज अखबार और दूध के आने से पहले ही मुँह-अँधेरे दरवाजे पर दस्तक हुई।
14.
आख़िर कल की तरह, मुँह-अँधेरे एक मोटर उसके दरवाजे के आगे आ खड़ी हुई।
15.
इसलिए मुँह-अँधेरे हम दोनों किसी इक्के के इंतजार में सड़क पर आ कर खड़े हो गए।
16.
बिल्कुल मुँह-अँधेरे सुबह-सवेरे चीड़, बुराँस, बाँज की लकडियाँ काट कर ले जाती स्त्रियाँ...
17.
कहाँ तो मुँह-अँधेरे उठते थे और चार मील का चक्कर लगा आते थे, कभी अलसा जाते थे तो देवीजी
18.
ग्वालिन दुःखी होकर बोली, 'मैं क्या करूँ? मैं तो मुँह-अँधेरे ही घर से निकल पड़ती हूँ, पर नदी पर आकर माँझी के लिए रुकना पड़ता है।
19.
एक स्त्री ने अपनी सहेली को बताया, 'मेरे पति केवल व्यायाम के लिए सुबह को मुँह-अँधेरे उठते हैं और छत पर चले जाते हैं।' ' पर उनका स्वास्थ्य तो कुछ बेहतर नहीं हुआ।'
20.
तड़के मुँह-अँधेरे की गाड़ी दूर सड़क के पार चीखती-चिल्लाती गुजर रही थी कि उसकी आँख खुली और मालिन धीरे से उसकी बाहों में से निकल कर मुँह-सिर लपेट तेज-तेज कदम अपने घर लौट आई।