जो शुद्ध वर्तमान है, इतिहास से परे, स्मृति के संसर्ग से अदूषित, संसार से मुक्त।
3.
यह वातावरण अदूषित होता है और यहां पर व्यक्ति गुणों की दृष्ट से परमेश्वर के समकक्ष होता है।
4.
” यदि रोगी व्यक्ति वैध द्वारा बताया गया शुद्ध, अदूषित अन्न खाता है तो वो धीरे-धीरे अच्छा हो जाता है.
5.
आकाश की विराटता हमेशा बंटती रहेगी छितरे हुए ख़ूबसूरत बादलों में रंगहीन प्रकाश की अदूषित ऊर्जा लहरियां कभी धवल कभी रक्तिम प्रतीत होती धूल के कणों से सतरंगी बन हमेशा हमेशा बिखरती रहेगी क्योंकि तत्त्व आपस में हमेशा जुड़ते रहेंगे सदा समागमित और पृथक होते रहेंगे