इन्हीं ख़यालों में डूबा बेहुनर म८ादूर मार्को अपने दिन की शुरूआत करता।
4.
इश्क में ए बेहुनर खुद को जलना सीखिए बाहरी परतों से गहराई में जाना सीखि ए. '
5.
यूँ हीं होतीं हैं कभी बेहुनर बातेंदिल करता हैकभी नगमाग़र बातेंपलकें झुक जातीं है और बन जातीं है ज़बान फिर कर ही जातीं हैं कभी अश्कतर बातेंतेरी ख़ामोशी अब जानलेवा होती जाती है कुछ तो करो मुझसे भी हमसफ़र बातेंदिल की बात कहींदिल
6.
यूँ हीं होतीं हैं कभी बेहुनर बातेंदिल करता हैकभी नगमाग़र बातेंपलकें झुक जातीं है और बन जातीं है ज़बान फिर कर ही जातीं हैं कभी अश्कतर बातेंतेरी ख़ामोशी अब जानलेवा होती जाती है कुछ तो करो मुझसे भी हमसफ़र बातेंदिल की बात कहींदिल...
7.
जब हमदमो हमराज़ था तब और ही अन्दाज़ था अब सोज़ है तब साज़ था अब शर्म है तब नाज़ था अब मुझसे हो तो हो भी क्या है साथ वो तो वो भी क्या इक बेहुनर इक बेसमर मैं और मिरी आवारगी
8.
वो जश्न वो रतजगे वो रंगीनियाँ कहाँ आये निकल वतन से हम भी यहाँ कहाँ महबूब मेरा चाँद मेरा हमनवां कहाँ इस बेहुनर शहर में कोई कद्रदां कहाँ कोई बुतखाना, परीखाना कोई मैक़दा नहीं ढूँढें इन्हें कहाँ और अब जा ए...