भुजबंध, अणत, टड्यो या टड्डा व तकया किस अंग के के आभूषण हैं?
2.
मूर्ति के सिर पर फारसी मुकुट, गले में हार, भुजबंध व हाथों में कंगन हैं।
3.
मूर्ति के सिर पर फारसी मुकुट, गले में हार, भुजबंध व हाथों में कंगन हैं।
4.
उन्होंने साड़ी, चोली, चादर, कर्णफूल, हार, भुजबंध आदि पहन रखे हैं।
5.
त्रिलड़ी मुक्ताहार, भुजबंध कंगन और कर्ण-आभूषण में शिल्प की बारीकियां देखने को मिलती है।
6.
मूर्ति के सिर पर फारसी मुकुट, गले में हार, भुजबंध व हाथों में कंगन हैं।
7.
बाजू में बाजूबंद या भुजबंध और अनन्त पहनते थे, जिनका परिचय भी पूर्व पृष्ठों में वर्णित है ।
8.
उनकी मुद्राओं के पृष्ठ भाग में साड़ी, चोली और चादर पहने तथा कुंडल, हार और भुजबंध धारण किये सिंहासन आरूढ़ लक्ष्मी का अंकन है।
9.
मन करता है फ़िर कोई अनुबंध लिखूं, गीत गीत हो जाऊँ ऐसा छंद लिखूं, सरसों की राग्रून चितवन दृष्टि कर गई सिंदूरी, योगी को वियोगी कह कर हो गयी बेला अंगूरी, लिखना ही है तो भुजबंध लिखूं ।
10.
चलें अनुबंध मन करता है फ़िर कोई अनुबंध लिखूं, गीत गीत हो जाऊँ ऐसा छंद लिखूं, सरसों की राग्रून चितवन दृष्टि कर गई सिंदूरी, योगी को वियोगी कह कर हो गयी बेला अंगूरी, लिखना ही है तो भुजबंध लिखूं ।