लेकिन इन्हीं के बीच प्रियवंद जैसे कुछ लेखक भी हैं।
3.
पर इस अंक में पढने जैसा बहुत कुछ है........... कमलेश्वर से लेकर... प्रियवंद तक
4.
लोग यदि देश के प्रसिद्ध कहानीकार मनोज रूपड़ा और प्रियवंद को खोजकर पढ़े तो उन्हें अच्छा लगेगा।
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लोग यदि देश के प्रसिद्ध कहानीकार मनोज रूपड़ा और प्रियवंद को खोजकर पढ़े तो उन्हें अच्छा लगेगा।
6.
इससे पहले यह सम्मान प्रियवंद, लवलीन, जयशंकर, अवधेश प्रीत, बोधिसत्व, संजय कुंदन, यतीन्द्र मिश्र, योगेन्द्र आहूजा आदि को प्रदान किया जा चुका है।
7.
अंग्रेजी शिक्षा के संदर्भ में प्रियवंद की यह किताब दरअसल कुछ तथ्यों को जो कि इतिहास के प्रचलित सत्य की तरह हैं को साफ करती है।
8.
यह एक अरूण कमल नहीं, कोई भी हो सकते हैं आलोक धन्वा भी, केदारनाथ सिंह भी, राजेश जोशी भी और उदय प्रकाश भी, प्रियवंद भी और अमरकान्त भी।
9.
इससे पहले यह सम्मान प्रियवंद, लवलीन, जयशंकर, अवधेश प्रीत, बोधिसत्व, संजय कुंदन, यतीन्द्र मिश्र, योगेन्द्र आहूजा आदि को प्रदान किया जा चुका है।
10.
जहाँ प्रियवंद की कहानियों में ऐसा ग़ज़ब का प्रवाह मिलता है कि वो किसी कविता से कम लयात्मक नहीं लगती मुझे, वहीं पंकज राग की बहुचर्चित “1857” को कविता कहने में हिचक होती है मुझे।